पिछले साल जून में झारखंड की राजधानी में हुई हिंसा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को रिपोर्ट मांगी। न्यायालय ने सरकार को मामले में दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।
पैगंबर मोहम्मद के बारे में भाजपा के दो निलंबित प्रवक्ताओं द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर पिछले साल 10 जून को रांची में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में दो लोगों की मौत हो गई थी और सुरक्षाकर्मियों सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस पर मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति आनंद सेन की खंडपीठ ने पंकज यादव द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
पीठ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने के पूर्व के निर्देश के अनुपालन में गृह सचिव वंदना दादेल और पुलिस महानिदेशक अजय कुमार सिंह अदालत में उपस्थित हुए। कोर्ट ने अधिकारियों को हलफनामे के जरिए मामले में की गई जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। पीठ ने निर्देश दिया कि हलफनामे में पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी के विवरण को हलफनामे में उजागर किया जाना चाहिए।
पंकज यादव के वकील राजीव कुमार ने अदालत को सूचित किया कि भीड़ ने 10 जून, 2022 को रांची के मेन रोड और आस-पास के इलाकों में पथराव किया, कारों को तोड़ा और मंदिरों में तोड़फोड़ की। भीड़ ने पुलिस पर भी हमला किया, जिसे जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी और गोलियां चलानी पड़ीं।
खंडपीठ ने राज्य सरकार से एक संभावित खुफिया चूक और पुलिस कर्मियों के खिलाफ पत्थर कैसे इकट्ठा किए गए और इसका इस्तेमाल किया, इस पर सवाल किया। वहीं अब दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।