पाकुड़ के बरहरवा रोड स्थित एक टोल प्लाजा के टेंडर में कथित अनियमितता से जुड़ा हुआ पूरा मामला है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने आदेश दिया कि ईडी को मामले में एक पक्ष बनाया जाए।
झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के मंत्री आलमगीर आलम और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पूर्व सहयोगी पंकज मिश्रा से जुड़े मामले में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पक्षकार बनाने का आदेश दिया।
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पाकुड़ के बरहरवा रोड स्थित एक टोल प्लाजा के टेंडर में कथित अनियमितता से जुड़ा हुआ पूरा मामला है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने आदेश दिया कि ईडी को मामले में एक पक्ष बनाया जाए। पाकुड़ के एक कारोबारी शंभू नंदन कुमार ने 2020 में आलम और मिश्रा के खिलाफ याचिका दायर की, जो मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि हुआ करते थे। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि आलम ने पाकुड़ में बरहरवा रोड पर टोल टैक्स सेंटर की नीलामी में हेरफेर करने में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश की। इसमें कुमार और मंत्री का छोटा भाई भी शामिल था। याचिकाकर्ता ने मंत्री पर धमकी देने का भी आरोप लगाया है।
कुमार के अनुसार, मिश्रा ने कथित तौर पर उन्हें फोन किया था और नीलामी में भाग लेने से रोकने के लिए अपने रसूख का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। पिछले महीने झारखंड पुलिस ने कहा कि बरहरवा टोल प्लाजा टेंडर मामले में कथित धमकी की जांच में मिश्रा और आलम निर्दोष पाए गए।