झारखंड में आदिवासियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। दरअसल शनिवार को राज्य सरकार ने शनिवार को एक बयान जारी कर बताया है कि वह राज्य में रहने वाले सभी आदिवासी समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए डिजिटल एटलस तैयार कराएगी। खास तौर पर कमजोर आदिवासी वर्ग की आर्थिक-सामाजिक स्थिति का आकलन किया जाएगा।
उपलब्ध डाटा के आधार पर बनाई जाएंगी योजनाएं
बता दें कि डिजिटल एटलस में किसी खास इलाके में रहने वाले लोगों की आर्थिक और भौगोलिक स्थिति का डिजिटल आंकड़ा तैयार किया जाता है। यह आंकड़े ऑनलाइन लाइब्रेरी में भी उपलब्ध कराए जाते हैं। सरकार की कोशिश है कि डिजिटल एटलस में मिले आंकड़ों के आधार पर आदिवासी वर्ग के उत्थान के लिए सरकारी योजनाएं बनाई जा सकेंगी। इस योजना के पहले चरण में कमजोर आदिवासी समुदायों का आधारभूत सर्वेक्षण किया जाएगा। सरकार के बयान में कहा गया है कि सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व में आदिवासी वर्ग के उत्थान के लिए डिजिटल एटलस तैयार किया जा रहा है।
कमजोर आदिवासी वर्ग पर खास फोकस
यह डिजिटल एटलस आदिवासी कल्याण आयुक्त की देखरेख में आदिवासी विभाग द्वारा तैयार कराया जाएगा। अगस्त 2024 तक 67501 कमजोर आदिवासी वर्ग के परिवारों का इस योजना के तहत विकास करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 3705 गांवों में रहने वाले 2,92,359 लोग शामिल हैं। डिजिटल एटलस में आदिवासी वर्ग के लोगों की शिक्षा, कौशल क्षमता, रोजगार, आय, जीवन स्थिति और आदिवासी गांवों में हुए विकास की जानकारी को शामिल किया जाएगा। जुटाए गए आंकड़े के आधार पर सामाजिक, स्वास्थ्य योजनाएं बनाई जाएंगी। आदिवासी वर्ग के लोगों को पक्का मकान, साफ पीने का पानी, बिजली, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, राशन की सुविधा, शिक्षा आदि की सुविधाएं दी जाएंगी।
आदिवासियों के पारंपरिक आय के साधनों को मजबूत किया जाएगा ताकि आदिवासी वर्ग की आय को बढ़ाया जा सके। आदिवासी छात्रों को मुफ्त रिहायशी कोचिंग दी जाएगी। खासकर समाप्ति के कागार पर पहुंच चुके आदिवासी वर्ग जैसे असुर, कोरबा, माल पहाड़िया, बिरहोर, साबर, बिरजिया और सौर पहाड़िया पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।