झारखंड में सहारा कंपनी में निवेश करने वाले लोगों को यह खबर राहत दे सकती है कि सहारा निवेशकों का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया है। झारखंड के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार सहारा निवेशकों की गाढ़ी कमाई की वापसी को लेकर गंभीर है और घटनाक्रम अपनी पैनी नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि यह मामला पूंजी बाजार नियामक सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) और शीर्ष अदालत के पास है।
वहीं भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने विधानसभा में सहारा के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि झारखंड के लोग जिनमें ज्यादातर गरीब मजदूर, किसान और कम आय वर्ग के लोग शामिल हैं, उन्होंने सहारा समूह की योजनाओं के साथ लगभग 2,500 करोड़ रुपये का निवेश किया और अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
साथ ही जायसवाल ने मांग की कि राज्य में एक 'हेल्पलाइन' स्थापित की जाए, जहां समूह में निवेश करने वाले व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकें, ताकि छात्रों के लिए झारखंड सरकार द्वारा बनाई गई हेल्पलाइन की तर्ज पर निवेशकों और फंड की सही संख्या पता चल सके।
वित्त मंत्री उरांव ने कहा कि छोटे निवेशकों ने समूह में धन का निवेश किया है। सहारा परिवार एक पंजीकृत कंपनी है। बाजार नियामक सेबी इसे देख रहा है। राज्य सरकार का इस पर ज्यादा नियंत्रण नहीं है। राज्य इससे पहले सहारा को शिकायत भेज चुका है। उन्होंने कहा कि सेबी सहारा रिफंड खाते में करीब 24,000 करोड़ रुपये की राशि पड़ी है और मामला शीर्ष अदालत में लंबित है।