इससे पहले राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच विवाद बढ़ता जा रहा था। दरअसल, झामुमो की ओर से राज्यसभा के लिए पार्टी नेता महुआ माजी को उम्मीदवार घोषित किया गया, जबकि यहां कांग्रेस अपना प्रत्याशी उतारना चाहती थी। बताया जा रहा है कि ऐसे में राज्यसभा सीट न मिलने से कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व झामुमो से नाराज हो गया था।
झारखंड की सियासत में कांग्रेस-झामुमो के बीच शुरू हुई अनबन की खबरों के बीच बुधवार को बड़ी खबर आई। बताया जा रहा है कि कांग्रेस-झामुमो-राजद गठबंधन में बेहतर तालमेल के लिए नौ सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया गया है। समिति की अध्यक्षता झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन करेंगे। इस बीच कांग्रेस ने झारखंड विधानसभा के लिए 66-मांडर-एसटी निर्वाचन क्षेत्र से होने वाले उपचुनाव के लिए शिल्पी नेहा तिर्की को अपना उम्मीदवार बनाया है।
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दरअसल, झारखंड के पूर्व खेल मंत्री बंधु तिर्की को एक मामले में सजा होने की वजह से उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। बंधु तिर्की कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में से एक माने जाते हैं। चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किए जाने के बाद उन्होंने अपनी बेटी को इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सौंपने की अपील शीर्ष नेतृत्व से की थी।
इससे पहले राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच विवाद बढ़ता जा रहा था। दरअसल, झामुमो की ओर से राज्यसभा के लिए पार्टी नेता महुआ माजी को उम्मीदवार घोषित किया गया, जबकि यहां कांग्रेस अपना प्रत्याशी उतारना चाहती थी। बताया जा रहा है कि ऐसे में राज्यसभा सीट न मिलने से कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व झामुमो से नाराज हो गया था।
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कयास लगाए जा रहे थे कि राज्यसभा प्रत्याशी को लेकर नाराज चल रही कांग्रेस झामुमो से अपना समर्थन वापस ले सकती है। अगर ऐसा होता है तो हेमंत सोरेन की सरकार गिर सकती है। वहीं हेमंत सोरेन का कहना है कि मैं सीधी बात करना पसंद करता हूं, लेकिन अभी गठबंधन से बंधा हुआ हूं, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।