वर्दी-ए-इंसाफ आंदोलन के लिए डटे संविदा पुलिसकर्मी
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झारखंड की राजधानी रांची में एक बार फिर संविदा पर नियुक्त सहायक पुलिसकर्मियों के उग्र आंदोलन का अंदेशा है। इस बार इन्हें रांची में नहीं घुसने देने की पुलिस की योजना धरी रह गई। ये संविदाकर्मी तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार से मोरहाबादी पहुंचने लगे हैं।
इन संविदा पुलिसकर्मियों ने अपनी मांगें पूरी नहीं होने के कारण रांची में आंदोलन की घोषणा की है। ये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निवास सीएम हाउस का भी घेराव करने वाले हैं। इसे ध्यान में रखते हुए 1000 से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं।
नहीं रोक पाए पुलिस के बंदोबस्त
बहाल किए गए दो हजार से ज्यादा संविदा सहायक पुलिसकर्मियों को फिर रांची में आंदोलन से रोकने के लिए यहां के रास्तों पर बैरिकेडिंग की थी। पुलिस जवान भी तैनात किए थे, लेकिन ये सारे उपाय विफल रहे और रविवार रात से ही इनके रांची पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। राज्य के 12 जिलों के संविदा पुलिसकर्मी स्थायीकरण और वेतनमान देने की मांग पर अड़े हैं। इसे लेकर ये अब रांची में आंदोलन करने पहुंचे हैं। इन सहायक पुलिसकर्मियों ने आंदोलन का नाम 'वर्दी-ए-इंसाफ' रखा है।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
बता दें, झारखंड के पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, खूंटी सिमडेगा, गिरिडीह, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला, लोहरदगा समेत 12 जिलों में 2017 में 2269 संविदा सहायक पुलिसकर्मियों की नियुक्ति हुई थी। लिखित परीक्षा व फिजिकल-मेडिकल परीक्षण के बाद वे चुने गए थे। तब कहा गया था कि तीन साल बाद जिला पुलिस में उन्हें नियुक्त किया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार बदलते ही इनका संविदा अनुबंध रद्द कर दिया गया। पिछले आंदोलन के बाद इन्हें बहाल तो कर दिया गया है लेकिन ये अब स्थाई सेवा व वेतनमान देने की मांग कर रहे हैं।