फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jharkhand: वन क्षेत्रों में नाइट्रोजन की भारी कमी, 69 प्रतिशत मिट्टी पौधों के विकास के लिए अनुपयुक्त

Sun, 04 Dec 2022 01:20 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

आईएफपी के मुख्य तकनीकी अधिकारी शंभू नाथ मिश्रा ने बताया कि अधिकांश वन प्रभागों में 160 किलोग्राम और 180 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच नाइट्रोजन की उपस्थिति है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

झारखंड के वन क्षेत्रों की मिट्टी में नाइट्रोजन की भारी कमी पाई गई है। रांची स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट प्रोडक्टिविटी (आईएफपी) द्वारा तैयार वन मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एफएसएचसी) रिपोर्ट के अनुसार वन क्षेत्रों की करीब 69 प्रतिशत मिट्टी पौधों के विकास के लिए अनुपयुक्त हो गई है।

विज्ञापन


एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर तैयार रिपोर्ट में चिंताजनक नतीजे सामने आए हैं। राज्य की वन भूमि में नाइट्रोजन की एक बड़ी कमी है। बता दें, गैर-अवक्रमित वन में नाइट्रोजन की उपस्थिति लगभग 258 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए, लेकिन यह 140 के औसत के करीब पाई गई है। 

आईएफपी के मुख्य तकनीकी अधिकारी शंभू नाथ मिश्रा ने बताया कि अधिकांश वन प्रभागों में 160 किलोग्राम और 180 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच नाइट्रोजन की उपस्थिति है। कुछ क्षेत्रों में यह आंकड़ा 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के करीब पहुंच गया है।
विज्ञापन


रिपोर्ट जारी करने वाला झारखंड पहला राज्य 
अधिकारियों का दावा है कि एफएसएचसी रिपोर्ट जारी करने वाला झारखंड देश का पहला राज्य बन गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के 31 क्षेत्रीय वन प्रभागों में 1,311 स्थानों से मिट्टी के 16,670 नमूने लिए गए। अधिकारियों ने बताया कि नाइट्रोजन की कमी के  घने और मध्यम वन कम हो रहे हैं। उन्होंने बताया,  प्रति हेक्टेयर 225 किलोग्राम यूरिया का उपयोग करके 90 किलोग्राम नाइट्रोजन की कमी को पूरा किया जा सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें