जांच एजेंसी ने सोरेन को पीएमएलए अदालत के न्यायाधीश राजीव रंजन के सामने पेश किया। जिन्होंने उनकी हिरासत तीन दिन के लिए बढ़ा दी। सोरेन ने 31 जनवरी को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। जिसके कुछ घंटों के बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
ईडी ने अदालत से कहा कि हेमंत सोरेन और उनके कथित करीबी सहयोगी बिनोद सिंह के बीच व्हाट्सएप पर बातचीत हुई थी। जिसमें रांची के बड़ागई इलाके में 8.5 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित बैंक्वेट हॉल की जानकारी मिली। एजेंसी ने आरोप लगाया कि यह सोरेन की ओर अवैध रूप से अर्जित और कब्जे वाली अचल संपत्ति है।
'अधिग्रहित जमीन के सही तथ्य नहीं बता रहे सोरेन'
एजेंसी ने अदालत से चार दिन की रिमांड की मांग की और हलफनामे में कहा, हेमंत सोरेन सहयोग नहीं कर रहे हैं और अपने व करीबियों के द्वारा अर्जित की गई संपत्तियों के बारे में सही तथ्य नहीं बता रहे हैं। इसने आगे कहा, पूर्व मुख्यमंत्री का बिनोद सिंह के साथ उनके व्हाट्सएप चैट से सामना कराया जा रहा है। इनमें अचल-संपत्तियों से जुड़ी सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल है।
'व्हाट्सएप चैट में प्रस्तावित बैंक्वेंट हॉल की जानकारी'
केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया कि आरोपी (हेमंत सोरेन) संपत्तियों के बारे में जानकारी छिपाने के लिए व्हाट्सएप चैट पर हस्ताक्षर करने और उसे स्वीकार करने से भी इनकार कर रहा है। हलफनामे में कहा गया, बिनोद सिंह और हेमंत सोरेन के बीच व्हाट्सएप चैट की जांच की गई। छह अप्रैल 2021 को हेमंत सोरेन की ओर से प्रस्तावित बैंक्वेट का मानचित्र या योजना साझा की गई। प्रस्तावित बैंक्वेट उस 8.5 एकड़ जमीन से मेल खाता है, जिसे हेमंत सोरेन ने अवैध रूप से अधिग्रहित किया है। ईडी ने दावा कि उस इलाके में जमीन का इतना बड़ा टुकड़ा उपलब्ध नहीं है, जहां निर्माण के लिए इतनी बड़ी संरचना (बैंक्वेट हॉल) की योजना बनाई जा सके।
'अपराध साबित करने वाले सबूत सामने आए'
ईडी ने कहा कि सोरेन जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। वह अपनी संपत्ति से जुड़ी जानकारी का खुलास करने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए, उनकी हिरासत अवधि बढ़ाई जाए। एजेंसी ने कहा कि मामले में सात फरवरी को छापेमारी की गई थी। नए सिरे से अपराध साबित करने वाले सबूत सामने आए हैं।