परिजनों का आरोप है कि बेटी की मौत डॉक्टर व अस्प्ताल प्रबंधन की लापरवाही से हुई है। लापरवाही का आलम यह था बेटी की मौत के बाद एक तो डॉक्टर निकल गए । प्रसूता की मौत के बाद भी यह देखने का प्रयास किसी ने नहीं किया कि बच्चा पेट में जीवित है अथवा मृत। परिजनों के अनुरोध के बाद भी कोई डॉक्टर ने जांच कर उसके मृत होने की पुष्टि नहीं की।
झारखंड के गुमला जिले में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही सामने आयी है। प्रसव कराने के लिए सदर अस्पताल पहुंची महिला और उसके बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद डॉक्टर ड्यूटी छोड़कर फरार हो गए। महिला के परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ तब जाकर परिजन घर लौटे।
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प्राप्त जाानकारी के मुताबिक, रायडीह प्रखंड के बरगी डांड़ की रहने वाली हैदर अली प्रसव पीड़ा होने के बाद अपनी 28 वर्षीय बेटी सोनी खातून को मंगलवार सुबह करीब 10 बजे साथ लेकर गुमला सदर अस्पताल पहुंचे थे। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने जच्चा सोनी के स्वास्थ्य की जांच की। ड़ॉक्टर ने फौरन ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराने की सलाह दी। शाम करीब चार बजे के बाद महिला को ऑपरेशन के लिए ले जाया गया, लेकिन दो घंटे बीत जाने के बाद कोई सूचना नहीं मिली। तब परिवार के लोगों ने डॉक्टर से जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन सूचना नहीं मिल पा रही थी।
परिवार वालों ने पीड़ित को देखने की गुहार लगाई, लेकिन डॉक्टर और अस्पताल के कर्मचारी देखने से मना कर रहे थे। कड़ी मशक्कत के बाद परिजन ओटी के अंदर गए। जहां पीड़ित सोनी की मौत हो चुकी थी । परिवार को रोते हुए देखकर ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. पूनम ने उसे रांची रेफर कर दिया। वहां से चली गई। हैरानी की बात तो ये है कि बच्चे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
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डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप
महिला को मृत तक घोषित नहीं किया गया। इसके बाद शाम छह बजे से रात नौ बजे तक अस्पताल परिसर में हंगामा होता रहा। सोनी के दूसरे रिश्तेदार भी अस्पताल पहुंच गए। हंगामे की सूचना के बाद अस्पताल पहुंचे थाना प्रभारी मनोज कुमार ने परिजनों को समझाया। रात करीब 9 बजे परिजन शव को अपने साथ ले जाने को तैयार हुए।