झारखंड विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी ने राज्य के भावी मुख्यमंत्री के रूप में रघुबर दास के नाम की घोषणा की है।
राज्य में पहली बार कोई गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री होगा। साल 2000 में झारखंड के गठन के बाद से राज्य में सबसे अधिक समय तक भाजपा ही सत्ता में रही है।
वहीं प्रचुर प्राकृतिक संपदा होने के बावजूद झारखंड का शुमार देश के सबसे पिछड़े राज्यों में होता है। राज्य के भावी मुख्यमंत्री रघुबर दास से इन्हीं मुद्दों पर की बात बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने।
झारखंड में पहली बार किसी गैर-आदिवासी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का क्या कोई राजनीतिक निहितार्थ है? ये कोई मुद्दा नहीं है। मुख्यमंत्री किसी वर्ग, जाति, संप्रदाय का नहीं होता। मेरे लिए यह कोई मुद्दा नहीं है। झारखंड भारत के बेहद पिछड़े राज्यों में गिना जाता है। ऐसे में आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं?
चौदह महीनों में हेमंत सरकार ने विरासत में राज्य को जो समस्याएं दी हैं उन्हें सुलझाने का काम करेंगे। साथ ही झारखंड में विकास की नींव को और मजबूत करेंगे।
हम झारखंड में पारदर्शी शासन, गुड गवर्नेंस और जवाबदेही देंगे ताकि जनता तक सरकारी योजनाओं का फ़ायदा पहुंच सके। झारखंड विकास पथ पर क्यों आगे नहीं बढ़ पा रहा है?
इसका बड़ा कारण राजनीतिक अस्थिरता है। इसमें कांग्रेस की बहुत बड़ी भूमिका है। राजनीतिक अस्थिरता के माध्यम से झारखंड में प्राकृतिक संसाधनों की लूट और भ्रष्टाचार की महामारी पैदा करने का काम किया गया।
कैसे होगा झारखंड का विकास?
विकास की बात तो केंद्र में भी होती है, लेकिन धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दे कहीं विकास के मार्ग में बाधा न बन जाएं? कुछ विरोधी लोग इस तरह के मुद्दे बनाते हैं, जिन्होंने हमेशा देश एवं समाज को तोड़ने का काम किया।
देश में जाति, धर्म और क्षेत्रवाद की राजनीति होती रही है, जिससे देश और हमारे झारखंड राज्य को भी काफ़ी नुकसान हुआ है। सरकार गठन के बाद आपकी तीन बड़ी प्राथमिकताएं क्या होंगी?
झारखंड राज्य में ढांचागत सुविधाओं का विकास करना, क़ानून व्यवस्था की स्थिति सही करना, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना हमारी प्राथिकता होगी। आप दो दशक से ज़्यादा समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं, फिर आपको मुख्यमंत्री का पद मिल रहा है। ऐसे में क्या काफ़ी वक़्त लग गया पार्टी को आपका काम पहचानने में?
पार्टी सही समय पर सही निर्णय लेती है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता किसी पद के लिए नहीं काम करते। यहां कार्यकर्ता राष्ट्र निर्माण, समाज निर्माण के लिए कार्य करते हैं।
और ये सब भाग्य का भी खेल होता है। आदमी को मेहनत करनी चाहिए, बाक़ी भाग्य पर छोड़ देना चाहिए। आप आजसू के साथ गठबंधन सरकार बनाने जा रहे हैं तो क्या आपके ऊपर कोई दबाव होगा? नहीं, ऐसा नहीं होगा। सरकार किसी भी तरह के दबाव में नहीं काम करेगी।