झारखंड के कई जिलों से अफ्रीकी देश कॉंगो गए सैकड़ों भारतीय मजदूर इबोला के फैलने से भयभीत हैं और अपने देश लौटना चाहते हैं। फोन पर वे अपना डर बयान करते हैं और स्थानीय प्रशासन को जानकारी मिल जाने के बाद, वापस आने के लिए सरकार की मदद का इंतजार कर रहे हैं।
इबोला वो ख़तरनाक बीमारी है जो एक मनुष्य के द्रव्यों से दूसरे तक फैलती है और जानलेवा हो सकती है। इससे अफ्रीकी देशों में 1000 से अधिक लोग मारे गए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके बारे में चेतावनी और इबोला से बचने के तरीकों की घोषणा की है।
"मजदूर आदमी हूं बहुत कुछ जानता नहीं, लेकिन ये जो बीमारी इबोला है ना, बहुत खतरनाक है। क्लिक करें इबोला का वायरस फैलता जा रहा है। पता नहीं कब क्या हो जाए। हर पल भय आंखों के सामने घूमता है। अपने राज्य के 500-600 लोग यहां फंसे हुए हैं। सरकार से कहकर यहां से निकाल लीजिए।"
अफ्रीका के कॉंगो से झारखंड के बालेश्वर महतो फ़ोन पर एक सांस में यह सब सब बोल जाते हैं। वे गिरीडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के नवाडीह गांव के रहने वाले हैं। साल भर पहले रोजी- रोटी कमाने कांगो गए थे। उनके साथ इसी गांव के और भी लोग हैं। वे कांगो में ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम करते हैं।
घर, परिवार, देश से दूर मुश्कलों से घिरे बालेश्वर कोई अकेले नहीं हैं। अफ़्रीका के कॉंगो, किनशासा में फंसे झारखंड के सैकड़ों मज़दूर क्लिक करें इबोला से डरे हुए हैं। वहाँ वायरस बढ़ रहा है, यहाँ उनके परिजनों की बेचैनी।
गिरिडीह के सरिया थाना क्षेत्र के खूंटा बंदखारो गांव के रहने वाले अरविंद कुमार पिछले महीने नौ अगस्त को किनशासा गए हैं। उनके पिता प्यारी महतो बताते हैं कि रविवार को बेटे ने फ़ोन पर बताया, " बाबूजी किसी तरह यहां से बचा ले जाइए। भर जिंदगी नून-रोटी खाएंगे पर परदेस नहीं जाएंगे।" वे बताते हैं कि जो लोग पहले ही वहां से लौटे हैं। वे कांगो के नाम से ही घबरा जाते हैं।