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Jharkhand: सरना धर्म को मान्यता की मांग, सांकेतिक भारत बंद असरदार; केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कही यह बात

Sat, 30 Dec 2023 06:38 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमशेदपुर

सार

सरना धर्म को मान्यता देने की वर्षों पुरानी मांग के समर्थन में आदिवासी संगठन ने 'प्रतीकात्मक भारत बंद' बुलाया। बंद के कारण शनिवार को झारखंड में कुछ स्थानों पर रेल सेवा बाधित हुई। आहूत बंद के कारण प्रदेशभर में वाहनों की आवाजाही भी बाधित हुई।
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झारखंड बंद। (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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झारखंड में 'प्रतीकात्मक भारत बंद' के कारण दक्षिण पूर्व रेलवे (एसईआर) के चक्रधरपुर और आद्रा डिवीजन में रेल सेवाएं बाधित हुईं। आदिवासी संगठन की तरफ से सरना धर्म को मान्यता देने की मांग के समर्थन में बंद आहूत किया गया। असरदार बंद के कारण झारखंड में कुछ जगहों पर रेल सेवाओं के साथ-साथ वाहनों के भी पहिए थम गए। आम-जनजीवन पर असर पड़ा। आवाजाही बाधित हुई। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया, आदिवासी सेंगेल अभियान (एएसए) के समर्थकों ने आद्रा डिवीजन के अंतर्गत कांताडीह-तानगर लाइन पर नाकेबंदी कर दी, इससे संचालन प्रभावित हुआ।
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केंद्रीय मंत्री बोले- सरना धर्म की मांग उचित मंच पर हो
आदिवासी सेंगेल अभियान के संबंध में केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने शनिवार को समाचार एजेंसी पीटीआई से बात की। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे व्यवधान जारी रहे तो आम जनता को बहुत असुविधा का सामना करना पड़ेगा। मुंडा ने कहा, इस तरह परेशान करने के बजाय सरना धर्म की मांग उचित मंच पर उठानी चाहिए।

राष्ट्रीय आयोग ने सरना धर्म को स्वतंत्र श्रेणी देने का सुझाव दिया
गौरतलब है कि सरना आदिवासी समुदायों की स्वदेशी धार्मिक आस्था है। इसे मानने वाले लोग मुख्य रूप से पहाड़ों, जंगलों और वन्य जीवन जैसे प्राकृतिक तत्वों की पूजा करते हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने सुझाव दिया है कि जनगणना के धर्म कोड में सरना धर्म को स्वतंत्र श्रेणी दी जाए।
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ट्रेनों की आवाजाही पर बड़ा असर
कांताडीह-तानगर लाइन पर पुरुलिया में रांची-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों को एक घंटे से अधिक समय तक रोका गया। रेलवे की तरफ से जारी बयान के मुताबिक बाद में ट्रेन को पुरुलिया-कोटशिला-मुरी-चांडिल-टाटानगर मार्ग पर डायवर्ट करना पड़ा। ट्रेन की यात्रा पुरुलिया के बाद बदले हुए रास्ते से पूरी हुई। हटिया-खड़गपुर एक्सप्रेस को रद्द करना पड़ा। रांची-हावड़ा एक्सप्रेस और हटिया-टाटानगर एक्सप्रेस को मुरी-चांडिल-टाटानगर के रास्ते डायवर्ट किया गया।

सांकेतिक भारत बंद के असर को लेकर रेलवे अधिकारी ने कहा कि लगभग 100 प्रदर्शनकारियों ने बहलदा रोड पर पटरियों को जाम किया गया। बंद समर्थक बड़ी संख्या में चक्रधरपुर डिवीजन के अंतर्गत आदित्यपुर-गमरिया और मालुका-डांगा ओपोसी स्टेशनों के बीच बैठ गए। आद्रा और चक्रधरपुर डिवीजनों में दोपहर 12.20 बजे के आसपास आंदोलन वापस ले लिया गया। बंद के बाद ट्रेन सेवाएं सामान्य हो गईं।

अधिकारियों ने बताया कि बंद समर्थकों ने करमडीह, टाटा-हटिया रोड, बिरसा चौक, सरायकेला के साथ-साथ चाईबासा-रांची रोड, बरियातू चौक जैसे प्रमुख जगहों पर असरदार तरीके से रास्ते जाम किए। आदिवासी सेंगेल अभियान (एएसए) के अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने दावा किया कि संगठन की तरफ से आहूत बंद को झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित पूर्वी भारत के अन्य हिस्सों में भी अच्छा समर्थन मिला।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सालखन मुर्मू पूर्व सांसद भी हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के पास बंद का आह्वान करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। सरनावाद को मान्यता देने की उनकी अपील लगातार अनसुनी की जा रही है। उन्होंने कहा, 'सरना धर्म कोड देश के 15 करोड़ आदिवासियों की पहचान है। ऐसा इसलिए क्योंकि आदिवासी केवल प्रकृति की पूजा करते हैं।' उन्होंने आगाह किया कि सांकेतिक भारत बंद के बावजूद अगर आदिवासियों की यह जायज मांग पूरी नहीं हुई तो संगठन आंदोलन तेज करेगा।
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