अरनिया। सरकारी नौकरी के लिए इन दिनों बेरोजगार कार्ड बनवाने के लिए युवाओं को तहसील कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। आलम यह कि कभी तहसील कार्यालय तो कभी नायब तहसीलदार कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ऐसे ही मामले सुचेतगढ़ तहसील में आ रहे हैं।
तहसील के पंचायत हल्का ब्यासपुर परलाह के सरपंच शशि कुमार का कहना है कि राज्य सरकार की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि सरकारी नौकरी में उन युवाओं को भी प्राथमिकता मिलेगी, जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं है। न ही उस परिवार का पेंशन भोगी होना चाहिए। बेरोजगार का कार्ड बनवाने के लिए मेरे पास पंचायत के हर रोज युवा सत्यापन के लिए मोहर लगवाने आते हैं। मैं उक्त परिवार का राशन कार्ड देख कर अपनी मोहर लगा देता हूं कि इसके परिवार में न तो कोई सेवा मुक्ति की पेंशन ले रहा है और न ही कोई सरकारी नौकरी में है। मगर फिर भी तहसीलदार युवाओं को कार्ड पर हस्ताक्षर करने के लिए अन्य औपचारिक लाने को कह रहे हैं। कभी सुचेतगढ़ स्थित तहसील कार्यालय तो कभी सात आठ किलोमीटर दूर दबलेहड़ स्थित नियाबत के चक्कर काट रहे हैं।
सरपंच ने बताया कि शनिवार को मैं खुद तहसील कार्यालय गया। मेरी पंचायत के युवाओं ने बताया कि आपकी मोहर और हस्ताक्षर के बाद भी हमारे बेरोजगार के कार्ड नहीं बन रहे। मैं सरकार से यह पूछना चाहता हूं कि क्या सरपंच की मोहर का कोई महत्व नहीं। अगर नहीं तो फिर लाखों रुपये खर्च कर पंचायत चुनाव कराने क्या लाभ है।