अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अमेरिका में हुई वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स के कुश्ती में स्वर्ण पदक विजेता जम्मू-कश्मीर पुलिस के दो जांबाज पहलवान बीनिया मीन और इशाक अहमद का जम्मू लौटने पर स्वागत हुआ। जम्मू एयरपोर्ट पर पहुंचे दोनों पहलवानों का फूल और रुपये के हार पहनाकर स्वागत किया गया। अपनी सफलता पर पहलवान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में प्रतिभा की कमी नहीं है सिर्फ मंच की जरूरत है। नशे के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार खेल है।
रविवार को पुलिस मुख्यालय जम्मू के गुलशन ग्राउंड में आयोजित समारोह में पुलिस बैंड की मधुर धुनों के साथ उनका स्वागत किया गया। बीनिया मीन और इशाक अहमद की यह जीत फिल्मी कहानी से कम नहीं। मिट्टी के पारंपरिक अखाड़ों और ग्रामीण स्तर पर होने वाली कुश्ती से शुरुआत करने वाले इन पहलवानों के संघर्ष ने उन्हें आज विश्व मंच पर पहुंचाया है।
बीनिया ने 95 किलोग्राम तो इशाक ने 125 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता है। दोनों ने अपनी सफलता का श्रेय जम्मू-कश्मीर पुलिस को दिया, जहां उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और निरंतर प्रोत्साहन मिला। दोनों पहलवानों ने मेजबान अमेरिका के पहलवानों को हराया।
स्वागत समारोह में पहलवानों के परिवार के सदस्यों ने कहा कि हमारे बच्चों ने न सिर्फ हमारा, बल्कि पुलिस विभाग का नाम रोशन किया है। कार्यक्रम में द्रोणाचार्य अवार्डी कुलदीप हांडू, अंतरराष्ट्रीय फेंसिंग रेफरी राशिद अहमद चौधरी, कोच कृष्णा सिंह लोग मौजूद रहे।
22 साल की मेहनत का मिला फल : बीनिया
बीनिया ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में प्रतिभा की कमी नहीं है। मंच मिलने की दरकार है। हमारी मेहनत इतनी ज्यादा होनी चाहिए जब कभी भी हमें मंच मिले तो हमारी कामयाबी बोले। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स में स्वर्ण पदक मेरी 22 साल की मेहनत का परिणाम है। अमेरिका के पहलवान को 95 किलोभार वर्ग में हराकर स्वर्ण पदक जीता है। युवाओं को अगर नशे से दूर रहना है तो उन्हें खेलों में आना होगा। पुलिस के सहयोग के बिना यह सफलता हासिल करना मुश्किल था।
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स्वर्ण पदक जीतना सपने के सच होने जैसा : इशाक
125 किलोभार वर्ग में स्वर्ण पदक विजेता इशाक अहमद ने कहा कि स्वर्ण पदक जीतना सपने के सच होने जैसा है। बड़े भाई बीनिया मीन को देखकर अपने खेल में काफी सुधार किया है। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें वह हर चीज मिली जो बड़े खेल के आयोजन में पदक जीतने के लिए जरूरी होती है। पुलिस विभाग का सहयोग और मंच न मिला होता तो शायद हम इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेना और पदक जीतना... सपना सच होने जैसा है। युवाओं को सपने देखने चाहिए। खेल नशे के खिलाफ हमारा हथियार है।