कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर में मजबूत इम्यूनिटी चाहिए और फेफड़े स्वस्थ होने चाहिए। तंबाकू का सेवन करने वालों में इन दोनों की कमी रहती है। ऐसे में तंबाकू मुक्त समाज से ही कोरोना संक्रमण से और बेहतर तरीके से लड़ा जा सकता है और मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।
जम्मू-कश्मीर में धूम्रपान और अन्य तंबाकू उत्पादों का प्रयोग करने वाले कोरोना मरीजों की गैर तंबाकू प्रयोग करने वाले मरीजों के मुकाबले ज्यादा मौतें हो रही हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों का दावा है कि तंबाकू खाने वाले कोरोना मरीजों के फेफड़े व लीवर पर गंभीर संक्रमण हो रहा है। इसलिए उनकी मौतें ज्यादा हो रही हैं। हालांकि, अभी तक प्रदेश में तंबाकू व गैर तंबाकू वाले कोरोना मरीजों की मौतों की संख्या के मामले में कोई स्टडी या शोध नहीं हुआ है।
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जीएमसी अस्पताल जम्मू के छाती रोग विशेषज्ञ व टीबी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर राहुल गुप्ता का कहना है कि कोरोना वायरस से मौत का ज्यादातर कारण फेफड़े व लीवर पर संक्रमण का गंभीर प्रभाव रहा है। इसी वजह से मरीजों में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती हैं। तंबाकू का सेवन करने वाले मरीजों में ज्यादातर ऐसा होता है। तंबाकू के ज्यादा सेवन से फेफड़े व लीवर पहले ही कमजोर हो चुके होते हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण होने पर सामान्य मरीजों के मुकाबले में उन पर संक्रमण का गंभीर असर हो रहा है।
मंडलायुक्त जम्मू की तरफ से बनाई गई कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. राजिंद्र थापा का कहना है कि तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों की इम्यूनिटी पहले से ही बहुत कम रहती है। उनके फेफड़े कमजोर हो चुके होते हैं। ऐसे मरीजों में टीबी भी होता है। अगर उन्हें कोरोना वायरस हो जाए तो उसके गंभीर परिणाम उन्हें भुगतने पड़ रहे हैं। तंबाकू का सेवन करने वाले मरीजों की ज्यादा मौतें हो रही हैं। भविष्य में इसकी पूरी स्टडी रिपोर्ट भी सामने आएगी।