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मुलाजिमों की मांगे क्यों पूरी नहीं कर रहे मुख्यमंत्री

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जम्मू एंड कश्मीर इंप्लाइज ज्वाइंट एक्शन कमेटी (के) के सदस्यों ने वीरवार को प्रेस कांफ्रेंस कर राज्य सरकार द्वारा मुलाजिमों और दैनिक वेतन भोगियों की मांगों को पूरा न कर गलत व्यवहार कर रहे हैं।
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प्रेस कांफ्रेंस की अध्यक्षता कर रहे कमेटी के प्रधान बलविंद्र सिंह ने राज्य सरकार विभिन्न विभागों में कार्यरत सरकारी मुलाजिम और दैनिक वेतन भोगियों की लंबित मांगों को पूरा नहीं कर रही है, जिसके कारण मुलाजिमों को कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि क्लेरिकल कैडर और अन्य कैडर की वेतन विसंगतियों को दूर करने के अलावा दस प्रतिशत तक का डीए और अन्य विभागों में कार्यरत अस्थायी मुलाजिमों को स्थायी करने के अलावा अन्य मांगें रखी थी। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अपील करते हैं कि वह उनकी लंबित मांगों को पूरा करे।
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उन्होंने कहा कि अगर सरकार मुलाजिमों की मांगों को पूरा नहीं करती है तो वह सरकार के खिलाफ जल्द ही विरोध प्रदर्शन करेंगे। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान धर्मेन्द्र , रवि ,रविंद्र, शाहिद, मोहन, रवि कुमार, रोहित, यशपाल, हामिद, रविंद्र, मोहम्मद अजीज, राजेश, जयदीप, परमजीत, बलवीर, अमरीक, बीएस पिंका और अन्य सदस्य उपस्थित थे।
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मुलाजिमों का आमरण अनशन शुरू

आल डिपार्टमेंट कैजुअल लेबर, नीड बेस, आईटीआई ट्रेंड, सीपी वर्कर युनाइटेड फ्रंट के बैनर तले अस्थायी कर्मियों ने वीरवार को पीएचई चीफ इंजीनियर कार्यालय बीसी रोड पर आमरण अनशन शुरू किया।

अनशन पर बैठे कर्मचारी कैजुअल और नीड बेस कर्मियों को स्थायी करने की पालिसी बनाने के साथ उन्हें बकाया वेतन शीघ्र जारी करने की मांग की। आमरण अनशन पर चेयरमैन तनवीर हुसैन, उपप्रधान अजय कुमार और सदस्य शशिपाल बैठे हैं। उन्होंने साफ किया कि कर्मियों की मांगों पर उचित कदम न उठाए जाने तक अनशन जारी रहेगा।

प्रदर्शन में पीएचई, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, आरएंडबी, पीडीडी, कृषि और पीएमजीएसवाई के अस्थायी कर्मचारी शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि विभिन्न विभागों में वर्षों से कैजुअल और नीड बेस कर्मचारी नियमित सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी करने के लिए कोई उचित पालिसी नहीं लाई गई है।
 
कई विभागों में अस्थायी कर्मचारी रीढ की हड्डी की तरह काम कर रहे हैं। सरकार ने कर्मियों के हित में कुछ न करके उन्हें आमरण अनशन के लिए मजबूर किया है। कर्मियों को कई महीनों से वेतन जारी न करने से उन्हें भारी आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। उनके सभी त्योहार फीके गए हैं। शुक्रवार भी आमरण अनशन जारी रहेगा।
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