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केंद्र जल्द बताए कब हटेगा अफस्पाः उमर

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रियासत में से फौजी कानून नहीं हटाने के केंद्र सरकार के रवैये से उमर खासे नाराज हो उठे हैं। वीरवार को लोकसभा में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री की ओर से एक सवाल के जवाब में कहा गया था कि फिलहाल केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर से अफस्पा (आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट) हटाने के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है।
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इस बात को लेकर उमर का पारा चढ़ गया है। श्रीनगर में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अफस्पा पर केंद्र सरकार के साथ लगातार चर्चा जारी है।

 पहले बातचीत यूपीए सरकार के साथ चल रही थी, अब एनडीए सरकार के साथ जारी है। उनका कहना था कि केंद्र में बैठे कुछ लोगों को इस कानून को हटाने के लिए कभी भी सही समय नहीं दिखेगा, भले ही जम्मू-कश्मीर में 100 फीसदी बंदूकें भी शांत हो जाएं।
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कौन से मापदंड पूरे करवाना चाहता है केन्द्र

उमर का यह भी कहना था कि हमें यह भी समझ नहीं आता कि केंद्र लेकिन मापदंडों को पूरा करवाना चाहता है। यदि हमें मापदंड बता दिएं जाएं तो हम उन मापदंडों को पूरा करवाने की कोशिश करेंगे।

रियासत से अफस्पा को न हटाने के मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताते हुए उमर ने कहा कि हम जब भी इसे हटाने की बात करते हैं तो इस वर्ष नहीं अगले वर्ष कहकर टाल दिया जाता है।

इस दौरान हालांकि, मुख्यमंत्री ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि केंद्र में बैठे लोगों की सोच में बदलाव आएगा और रियासत से अफस्पा को हटाने का काम शुरू हो जाएगा।
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सुरक्षा के लिहाज से महफूज रहेंगे चुनाव

इस दौरान उमर ने आगामी विधानसभा चुनाव के सबसे मुश्किल होने के मद्देनजर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह चुनाव मुश्किल है।

उमर ने कहा कि 1996 के चुनाव सबसे मुश्किल थे। उमर का कहना था कि आज के हालात में तब के हालात में जमीन आसमान का अंतर है।

सियासी तौर पर तो यह चुनाव कुछ लोगों के लिए मुश्किल हो सकते हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से कोई दिक्कत नहीं है।

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