श्री माता सुकराला देवी और श्री माता बालासुंदरी श्राइन बोर्ड के वर्ष 2013 में गठन के नौ साल बाद आधिकारिक तौर पर वेबसाइट और लोगो जारी किए गए हैं। बिलावर स्थित माता सुकराला देवी के मंदिर में बुधवार को पहुंचे मंडलायुक्त डॉ. राघव लंगर ने आधिकारिक तौर पर लोगो और वेबसाइट का उद्घाटन किया। फिल्हाल इस वेबसाइट पर माता की आरती का उल्लेख, आसपास के दार्शनिक स्थलों, मंदिर के इतिहास के साथ साथ ठहरने के प्रबंधों की जानकारी भी भक्तों के लिए उपलब्ध रहेगी।
जम्मू संभाग के श्री माता वैष्णो देवी मंदिर के बाद सबसे प्रसिद्ध इस मंदिर में हर साल लाखों की तादाद में भक्त पहुंचते हैं। जुलाई 2021 में मंडलायुक्त डॉ. राघव लंगर ने मंदिर का दौरा कर वेबसाइट तैयार करने और अन्य सुविधाओं को भक्तों के लिए विकसित करने के निर्देश दिए थे।
अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में वेबसाइट पर भेंट प्रसाद से लेकर लाइव दर्शन की व्यवस्था भी कर दी जाएगी। बुधवार को बिलावर के श्री माता सुकराला देवी मंदिर में पहुंचे मंडलायुक्त ने मंदिर में शीश झुकाकर मंदिर का लोगो और वेबसाइट का उद्घाटन किया।
उन्होंने बारीदारों के साथ भी विचार विमर्श किया और मंदिर के न्यायालय में चल रहे मामले को हल करने की बात की। कहा कि इसके चलते मंदिर विकास के कई काम रुके हैं, ऐसे में उन्हें सहयोग करना चाहिए। यह भी आश्वस्त किया गया कि श्राइन बोर्ड के आधिकारिक सदस्यों को शामिल कर जल्द पुनर्गठन किया जाएगा।
मामला कोर्ट में विचाराधीन, चढ़ावा बैंक में हो रहा जमा
तत्कालीन मंडलायुक्त शांत मनु और डीसी जितेंद्र कुमार सिंह ने 11 नवंबर 2013 को विधिवत पूजन कर श्री माता सुकराला देवी और श्री माता बालासुंदरी श्राइन की शुरूआत करवाई थी। लेकिन बारीदारों की समस्याओं का समाधान न किए जाने के चलते मामला कोर्ट में विचाराधीन हो गया और विकास कार्यों पर भी ब्रेक लग गई।
बोर्ड के तत्कालीन नामित सदस्यों का कार्यकाल भी खत्म हो गया लेकिन भक्तों के हाथ सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं लगा। बोर्ड का काम भवन में चढ़ने वाले चढ़ावे के रूप में पैसे को उठाकर सिर्फ बैंक में जमा करवाने तक ही सीमित रह गया है।
डुग्गर प्रदेश के देवी मंदिरों में माता सुकराला देवी का मंदिर काफी प्रसिद्ध है। सुकराला माता को मल्ल देवी के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर बिलावर से 9 किलोमीटर दूर उत्तर पूर्व की ओर एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है।
मंदिर में मल्ल देवी की पिंडी है जो बहुमूल्य गहनों तथा वस्त्रों से सजी हुई है। कहते हैं कि प्राचीन काल में यह स्थान शुक्रालय और फिर सुकराला के नाम से प्रसिद्ध हुआ।