- न बिजली और न ही मिल रहा पानी, मलबा हटाने में ही बीत रहा दिन
- लोगों का आरोप, न बाढ़ के समय और न बाद में कोई मदद के लिए आगे आया
सूर्यचक और मंगुचक से ग्राउंड रिपोर्ट
निखिल मेहता
जम्मू। जिले में बारिश से हुई तबाही का मंजर कुछ ऐसा है कि बारिश की दो बूंदें गिरने से ही लोग दहशत में आ रहे हैं। फ्लायं मंडाल के सूर्यचक और मंगुचक इलाके में बीते मंगलवार को हुई भारी बारिश ने बर्बादी का ऐसा तांडव किया है कि पांच दिन बाद भी लोग न तो खुद को संभाल पा रहे हैं और न ही घर-गृहस्थी को। मलबे के साथ लोग ट्राॅलियां भर-भरकर बर्बाद हुआ सामान फेंक रहे हैं।
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की सरकार और प्रशासन से इतनी शिकायतें हैं कि बात करते ही उनका दर्द आंखों से छलक आता है। सूर्यचक निवासी रेनु देवी का कहना है कि 2014 में आई बाढ़ भी झेल चुके हैं, लेकिन इतनी बर्बादी नहीं हुई थी। इस बार तो किसी ने हाल भी नहीं पूछा, न सरकार ने कोई मदद की और न ही प्रशासन आगे आया। पांच दिन बीत चुके हैं अभी तक सफाई ही नहीं हो पाई है। घर में चार फुट तक मलबा भरा है। पूरा परिवार सुबह से लेकर शाम तक इसे निकालने में ही जुटा रहता है। इतने दिन से जमा गंदगी के कारण घर में दुर्गंध के साथ मच्छर पनप रहे हैं। न तो इनसे बचने के लिए घर में कोई कपड़ा बचा है और न बिजली है। पूरी गृहस्थी उजड़ गई है। शकुंतला देवी का कहना है कि घर की एक भी ऐसी नुक्कड़ नहीं है, जहां मलबा न हो। समझ नहीं आ रहा कि बच्चों को लेकर जाएं कहां। शाम होते ही घबराहट शुरू हो जाती है कि कैसे छत और बिजली के बिना रात कटेगी। सब कुछ तो बाढ़ में बर्बाद हो गया है। केवल चार बर्तन बचे हैं। अजय ने आप बीती सुनाते हुए बताया कि न ही बाढ़ के समय और न बाढ़ के बाद कोई मदद के लिए आगे आया। दिहाड़ी लगाकर घर का गुजारा चलता था। पांच दिन से काम पर भी नहीं जा पाया हूं। सुबह से शाम बस घर से मलबा हटाने और सफाई में निकल जाता है। न खाने को राशन बचा है और न ही सोने के लिए बिस्तर। कभी किसी के घर तो कभी छत पर रात गुजार रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि कैसे यह सब संभलेगा।
दोनों तरफ तवी, रिंग रोड के
कारण पानी की नहीं हुई निकासी
जम्मू। आरएस पुरा-जम्मू साउथ के मंगुचक इलाके में बाड़ से हुई भारी तबाही ने इलाके के लोगों को इतना बेबस और लाचार कर दिया है कि अपने ही घरों में रह नहीं पा रहे। गांव के करीब 70 घर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। गांव के लोग खुद के खर्च से सफाई करवा रहे हैं। न घरों में बिजली है और न ही पानी। बाढ़ के कारण धान की फसल भी बर्बाद हो चुकी है। घरों की हालत ऐसी है कि दीवारों पर दरारें आ गई हैं। मंगुचक के नंबरदार सतपाल का कहना है कि गांव में दो तरफ से तवी लगती है। पहले भी पानी चढ़ता था, लेकिन इस बार निकासी नहीं हो पाई जिसका मूल कारण रिंग रोड है। पानी को निकले की जगह ही नहीं मिली जिससे पानी तो दोनों तरफ से आया, लेकिन निकासी के रास्ते पर्याप्त नहीं हैं।
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मुश्किल से बचाई जान, बच्चों को
पड़ोसी के घर छोड़ना पड़ रहा
मंगुचक के गज्जन सिंह ने बताया कि पानी इतनी रफ्तार से बड़ा कि मुश्किल से जान बचाई। सफाई कैसे होगी न तो बिजली है और न पानी। प्रशासन या सरकार की तरफ से भी कोई मदद नहीं मिली है। यहां तक कि एक बार भी कोई गांव की हालत देखने तक नहीं आया। किसान मंगल दास का कहना है कि किसानी से ही घर का गुजारा होता था। बाढ़ ने सारी फसल बर्बाद कर दी है। समझ नहीं आ रहा कि अब परिवार को क्या खिलाऊंगा। घर का भी सारा सामान खराब हो चुका है। मंगुचक की मीना देवी ने बताया कि रात को बच्चों को पड़ोसी के घर छोड़ आते हैं और दिन भर छत पर रखते हैं। घर की हालत इतनी जर्जर हो चुकि है कि किसी भी वक्त गिरने का डर रहता है। घर में पड़े जरूरी दस्तावेज भी पानी के साथ तबाह हो चुके हैं। कुछ संस्थाएं खाने का प्रबंध कर रही हैं। सरकार की तरफ से एक रोटी तक नहीं भेजी गई। पूरा दिन सफाई में बीत जाता है। शाम होते ही बिजली न होने से सभी काम रुक जाते हैं। ऐसी बर्बादी देखने के बाद थोड़ी सी बारिश भी होती है तो घबराहट होने लगती है।