कश्मीर घाटी में दो दिन बाद शुक्रवार को मौसम में सुधार होने से बाढ़ का
खतरा टल गया है। हालांकि, झेलम का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान के पास है।
लेकिन, पिछले 24 घंटों में लगातार जलस्तर के घटने से राहत है। उधर, जम्मू
में मौसम साफ रहने से तपिश ने फिर जोर पकड़ लिया है।
इस बीच, जम्मू-श्रीनगर
हाईवे पर रामबन के पास भारी जाम से श्रीनगर से जम्मू के लिए छोड़े गए वाहन
घंटों देरी से गंतव्य तक पहुंचे। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24
घंटों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। दक्षिणी और मध्य कश्मीर
में नदी नालों का जलस्तर घटा है। लेकिन, उत्तरी कश्मीर में अभी जलस्तर
ज्यादा चल रहा है।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के चीफ इंजीनियर
मीर जावेद जाफर ने बताया कि जिस तरह से झेलम का जलस्तर संगम और राम
मुंशीबाग में घटना शुरू हुआ है उससे बाढ़ का खतरा कम हो रहा है। शुक्रवार
रात तक जलस्तर और गिर जाएगा। इसके चलते लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
मौसम विभाग श्रीनगर के निदेशक सोनम लोटस के अनुसार 29 जून तक मौसम में
सुधार रहेगा। इसके बाद हलकी बूंदाबांदी की संभावना है।
इन इलाकों में भी आ गया था बाढ़ का पानी
श्रीनगर में शुक्रवार को दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री
गिरकर 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले दो दिन से मूसलाधार बारिश
से अनंतनाग जिले में नई बस्ती, टाकिया बेहरामपुर, शमसीपुरा आदि इलाकों में
बाढ़ का पानी भर आया था। जम्मू में मौसम साफ रहने से दिन का अधिकतम तापमान
37 डिग्री तक पहुंच गया है।
लेह में अधिकतम तापमान 19.1 और न्यूनतम
9.7, पहलगाम में अधिकतम 22.1, न्यूनतम 7.6, गुलमर्ग में न्यूनतम 4.4,
कारगिल में अधिकतम 21.0, न्यूनतम 9.2 और कटड़ा में अधिकतम 33.2, न्यूनतम
19.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
26 जून शाम 6 बजे झेलम नदी का जलस्तर
संगम में 21.65 फ़ीट (बाढ़ की घोषणा 21 फीट और खतरे का निशान 23 फीट)
राम मुंशीबाग में 20.65 फीट (बाढ़ की घोषणा 18 फीट और खतरे का निशान 19 फीट)
अशम में 14.41 फीट (बाढ़ की घोषणा 14 फीट और खतरे का निशान 15 फीट)