केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह चीन और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ गरजे। साफ शब्दों में कहा कि भारत अपने दोनों पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान से संबंध सुधारना चाहता है। इसके लिए उसने दोस्ती का हाथ भी बढ़ाया है।
लेकिन भारत के मान-सम्मान की कीमत पर दोस्ती नहीं चाहिए। एशिया महाद्वीप में शांति के लिए पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते होने चाहिए। तभी यहां शांति और विकास संभव है। सीमा विवाद, आतंकवाद समेत सभी मसलों का हल बातचीत से संभव है।
वे यहां भारत-तिब्बत सीमा सुरक्षा पुलिस बल (आईटीबीपी) के 47वीं वाहिनी परिसर का उद्घाटन करने आए थे। लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए सोमवार से वे रियासत के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान वे बार्डर केफारवर्ड पोस्टों पर जाकर सरहद की सुरक्षा इंतजामों की जानकारी लेंगे।
आतंकवाद सभी मसले का हल बातचीत से संभव
भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से दस किलोमीटर दूर आईटीबीपी के परिसर में उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा पर चुनौतियां बढ़ीं हैं। भारत, चीन से संबंध सुधारना चाहता है। चीन ही नहीं बल्कि अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ बेहतर दिली रिश्ते चाहता है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहते थे कि दोस्त बदल सकते हैं पर पड़ोसी नहीं। इस वजह से भारत ने पड़ोसी देशों के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश शुरू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसके प्रयास किए।
इसी के तहत शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने सभी राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया। केवल हाथ से हाथ मिलाने के लिए नहीं बुलाया गया बल्कि दिल से दिल मिलाने के लिए। चीन से भी दोस्ती बढ़ाने की पहल की गई, लेकिन दो टूक जवाब भी दिया गया कि जितने भी विवादित मुद्दे हैं उसका हल निकाला जाना चाहिए। घुसपैठ रुकनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत शांतिप्रिय देश है। वह केवल अपनी सीमा की सुरक्षा चाहता है। भारत न कभी विस्तारवादी रहा है, न है और न ही भविष्य में होगा। इस दौरान रियासत के डिप्टी सीएम डा. निर्मल सिंह, उद्योग मंत्री चंद्रप्रकाश गंगा, आईटीबीपी के डीजी कृष्ण चौधरी भी मौजूद थे।