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लद्दाख सीमा पर 812 किलोमीटर सड़कें बनेंगी

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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत-चीन सीमा पर कनेक्टिविटी सबसे बड़ी चुनौती है। इसके तहत 812 किलोमीटर लंबी 34 सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही 35 चौकियों पर कनेक्टिविटी के लिए मोबाइल टावरों का निर्माण शुरू करा दिया गया है।
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लेह में 240 कार्मिकों के लिए ट्रांजिट कैंप निर्माण को जल्द मंजूरी दी जाएगी। इसके साथ ही 9000 फीट से ऊंचाई वाले चोटियों पर तैनात जवानों को विशेष मेडल से सम्मानित किया जाएगा।

आईटीबीपी के 47वीं वाहिनी परिसर का उद्घाटन करते हुए कहा कि आईटीबीपी के आठ बटालियन, 40 सीमा चौकियों तथा 12 सब्सिडरी चौकियों को जल्द ही मंजूरी दी जाएगी। आईटीबीपी के जवानों से संवाद करते हुए कहा कि उनकी सुविधाओं में बढ़ोतरी की जाएगी।
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लेह में आईटीबीपी का बनेगा ट्रांजिट कैंप

एलटीसी और चिल्ड्रेन एजुकेशन एलाउंस जो प्रशिक्षण एवं कार्मिक विभाग के पास लंबित है, उसे जल्द ही मंजूर किया जाएगा। लेह और लद्दाख में सात बटालियन के 9963 जवान सुदूरवर्ती सीमा पोस्टों पर तैनात रहते हैं, जिनकी बेहतरी के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पैरा मिलिट्री फोर्स के पास पहले पांच करोड़ रुपये के काम का अधिकार था, जिसे बढ़ाकर 20 करोड़ कर दिया गया है। आपरेशन या ड्यूटी के दौरान घायल या अस्वस्थ होने के बाद अस्पताल में भर्ती होने वाले जवानों को पहले आफ ड्यूटी माना जाता था, लेकिन उनकी जानकारी में यह बात आने पर व्यवस्था बदल दी गई।

अब उन्हें आन ड्यूटी माना जाता है। गृह मंत्री ने साफ-साफ कहा कि वे आश्वासनों की घुट्टी नहीं पिलाना चाहते हैं, बल्कि वे उन्हीं कामों की घोषणा करते हैं जो उनके अधिकार क्षेत्र में हों। वे बार्डर फोर्स को माडर्न फोर्स के रूप में विकसित करना चाहते हैं।
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