अलगाववादियों तथा आतंकियों के चुनाव बहिष्कार के बीच श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव में रविवार को भारी हिंसा हुई। इसमें आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा
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सुरक्षा के जवान, स्थानीय लोग औऱ मतदान कर्मी घायल हुए हैं। दर्जनभर से अधिक पोलिंग बूथ पर भीड़ ने हमला कर ईवीएम तोड़ दी।
पोलिंग बूथ पर पेट्रोल बम से हमले किए गए। कुछ स्थानों पर पोलिंग बूथ बदलने पड़े। उपद्रवियों को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और फायरिंग तक करनी पड़ी। दिनभर पत्थरबाजी चलती रही। चुनाव ड्यूटी में लगे एक दर्जन से अधिक वाहनों को फूंक दिया। उपद्रव बढ़ता देख सुरक्षा बलों की मदद के लिए सेना को बुलाया गया।
हिंसा में नागरिकों की मौत के विरोध में अलगाववादियों ने सोमवार को बंद का आह्वान किया है। घाटी में आतंकवाद का दौर शुरू होने के बाद हिंसा तथा उपद्रव के बीच श्रीनगर में अब तक का सबसे कम 6.50 प्रतिशत वोट पड़े हैं। चुनाव खत्म होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) शांतमनु ने बताया कि 200 से अधिक हिंसा की घटनाएं हुई हैं। इसमें छह नागरिकों की मौत तथा 17 घायल हुए हैं। सुरक्षा बलों के 100 जवान घायल हुए हैं। दो बूथों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
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हिंसा की वजह से पोलिंग बूथ छोड़ भागे कर्मचारी
kashmir
- फोटो : PTI
उन्होंने बताया कि लगभग 80 हजार मतदाताओं ने वोट डाले। इनमें 2388 माइग्रेंट वोटर हैं। कुल 1582 बूथ बनाए गए थे। इनमें श्रीनगर में 1559 बूथ थे। माइग्रेंट वोटरों के लिए जम्मू में 19, उधमपुर में एक और दिल्ली में तीन बूथ बने थे। 1600 ईवीएम लगाए गए थे। कुल पांच आब्जर्वर चुनाव पर नजर रखे हुए थे। उन्होंने बताया कि 50 से 100 बूथों पर पुनर्मतदान हो सकता है। फिलहाल इस पर विचार किया जा रहा है।
श्रीनगर लोकसभा सीट में तीन जिले श्रीनगर, बडगाम और गांदरबल आते हैं। सबसे ज्यादा हिंसा की घटनाएं बडगाम में हुई हैं। बडगाम जिले के बीरवाह तथा चरारे शरीफ के पखरपोरा में दो-दो तथा चाडूरा व मागाम में एक-एक लोग हिंसा में मारे गए। भीड़ के हिंसक प्रदर्शन के कारण जिले के 70 फीसदी से अधिक पोलिंग बूथ छोड़कर स्टाफ भाग खड़े हुए थे। गांदरबल जिले में एक पोलिंग बूथ पर पेट्रोल बम से हमला किया गया।
चरारे शरीफ के पखरपोरा में बने पोलिंग बूथ पर सैकड़ों की भीड़ ने धावा बोल दिया और तोड़फोड़ की। भीड़ को हटाने के लिए पहले तो सुरक्षा बलों ने हवाई फायरिंग की। इसके बाद भी वे तोड़फोड़ करते रहे तो सुरक्षा बलों की ओर से की गई फायरिंग में छह लोग घायल हो गए। इसमें मोहम्मद अब्बास (20) व फैजान अहमद राथर (15) की बाद में मौत हो गई। बीरवाह में भी पथराव कर रही भीड़ को खदेड़ने के लिए की गई फायरिंग में निसार अहमद की मौत हो गई।
दोपहर बाद बीरवाह में ही दोबारा पथराव कर रहे युवकों को तितर बितर करने के लिए की गई फायरिंग में आकिब वानी की मौत हुई। चाडूरा विधानसभा के दौलतपोरा इलाके में फायरिंग में शब्बीर अहमद की जान चली गई।
मागाम शहर में भी भीड़ को हटाने के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया। यहां पेलेट से गंभीर रूप से घायल आदिल फारूक ने दम तोड़ दिया। अधिकारियों का कहना है कि पोलिंग बूथ की सुरक्षा के लिए बीएसएफ को लगाया गया था। उन्हें पेलेट गन नहीं दिया गया था। इस वजह से उन्होंने फायरिंग की।
चाडूरा में प्रदर्शनकारियों की ओर से भारी पथराव किए जाने की वजह से दो पोलिंग बूथ पर सुरक्षाबलों को भागकर जान बचानी पड़ी। श्रीनगर लोकसभा में आने वाले तीन जिलों में दर्जनभर से अधिक स्थानों पर पथराव की घटनाएं हुईं। गांदरबल जिले के चिनार इलाके में वोट डालने जा रहे रमजान राथर तथा उनकी पत्नी पर भीड़ ने हमला बोल दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें कंगन अस्पताल ले जाया गया। वाकू रा में सुरक्षा बलों पर पथराव के बाद आंसू गैस के गोले दागे गए।
कश्मीर में हिंसा के हालातों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रीनगर सीट से नेकां उम्मीदवार फारूक अब्दुल्ला ने सरकार की नीयत पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार शांतिपूर्ण चुनाव के लिए माहौल उपलब्ध कराने में नाकाम रही है। सरकार चुनाव की प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
सोनवार के बूथ नंबर 36 पर मतदान के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि चुनाव शांतिपूर्ण होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से सरकार ऐसा माहौल देने में विफल रही है जिसमें लोग घर से बाहर निकलें और मतदान करें। सरकार चुनाव की प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रही है। दावा किया कि वे अपनी जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकार, केंद्र और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे 20 वर्षों से राजनीति में हैं, पर चुनाव और चुनाव प्रचार के दौरान इतने बुरे हालात कभी नहीं देखे। यह राज्य व केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की नाकामी है।
हिंसा के चक्र को रोकने को सभी एकजुट हों : महबूबा
जम्मू। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर सीट के उपचुनाव में मतदान के दौरान हुई मौतों पर गहरा दुख व्यक्त किया है। कहा कि वह यह जानकर दुखी हैं कि मरने वालों में कई युवा और किशोर हैं, जिन्होंने अभी तक मुद्दों की जटिलताओं को समझा नहीं था। कहा कि उन्होंने बार बार दोहराया है कि राज्य को वर्तमान हालात से बाहर लाने के लिए हिंसा नहीं, शांतिपूर्ण तरीका ही एकमात्र रास्ता है। दुर्भाग्य से तीन दशकों से हिंसा ग्रस्त राज्य मेें समय की मांग है कि सभी विचारधारा वाले लोगों को एकजुट होना चाहिए। साथ ही हिंसा और रक्तपात के इस चक्र को रोकने में मदद करनी चाहिए।