ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में निर्माणाधीन विकास परियोजनाओं पर हिंसा की मार पड़ रही है। आलम यह है कि एशियन डेवलपमेंट बैंक द्वारा प्रायोजित परियोजनाओं का अब समय से पूरा होना बेहद मुश्किल हो गया है।
इसका सीधा असर परियोजनाओं के लागत मूल्य पर पड़ेगा, जिसकी फंडिंग अटकने से परियोजनाएं अधर में लटकी रह जाएंगी। निर्माण एजेंसी इकोनॉमिक रिकंस्ट्रक्शन एजेंसी (इरा) प्रशासन ने इस आशय की जानकारी दी है।
इरा प्रशासन की बैठक की अध्यक्षता करते हुए इरा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनोद शर्मा ने कहा श्रीनगर की परियोजनाओं में लगे 600 कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिक काम छोड़कर अपने घरों को लौट चुके हैं। निर्माण सामग्री की सप्लाई भी पूरी तरह से ठप हो गई है।
नये सिरे से श्रमिकों की व्यवस्था करने में तीन से चार महीने का समय लगेगा। एशियन डेवलपमेंट बैंक द्वारा प्रायोजित ऋण वाली परियोजनाओं को मार्च 2017 तक पूरा करने की बाध्यता है। घाटी के हालात में यह कार्य पूरे होना मुश्किल हैं। अच्चन में कचरा निस्तारण के लिए प्रस्तावित सेनिटरी लैंडफिल साइट सेल को इसी महीने के अंत तक पूरा होना था जो लटक गया है।
जहांगीर चौक-रामबाग फ्लाईओवर को भी समय से पूरा करना कठिन है। 27 पंपिंग स्टेशनों को अपग्रेड करने, वाटर ड्रेनेज सिस्टम तैयार करने सहित अन्य परियोजनाएं घाटी के हालात से प्रभावित हो रही हैं। सीईओ ने कहा लागत मूल्य बढ़ने से परियोजनाएं पूरी नहीं हो पाएंगी जिसका खामियाजा स्थानीय लोगाें को भी भुगतना पड़ेगा।