जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने जानकारी दी कि सुबह वैष्णो देवी में मची भगदड़ के बाद एक बार फिर से कोरोना गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने के साथ तीर्थयात्रा शुरू कर दी गई है। जम्मू के संभागीय आयुक्त राघव लंगर ने कहा कि भगदड़ में मारे गए चार लोगों के शवों को उनके मूल स्थानों पर भेज दिया गया है, जबकि बाकी शवों को भेजने की प्रक्रिया जारी है।
लंगर ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) मुकेश सिंह के साथ स्थिति का जायजा लेने के लिए आधार शिविर कटरा का दौरा किया। कुप्रबंधन ने बताया कि कोविड-19 के दिशानिर्देशों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद अब एसओपी के सख्त पालन के साथ यात्रा जारी है। भगदड़ के कारणों के बारे में लंगर ने कहा कि उपराज्यपाल ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है और जांच आगे बढ़ने पर विवरण साझा करेंगे। लंगर ने बताया कि प्रशासन और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने आने वाले तीर्थयात्रियों के परिवार के सदस्यों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं जो अपने प्रियजनों से संपर्क करना चाहते हैं।
संभागीय आयुक्त ने कहा कि सभी मृतक व्यक्तियों के शवों की पहचान कर ली गई है और 10 के रिश्तेदारों से संपर्क किया जा चुका है ताकि शवों को उनके घर भेजा जा सके। उन्होंने बताया कि हम मृतकों के शवों को पूरे सम्मान के साथ उनके गर भेज रहे हैं। दो शव पहले ही हरियाणा और राजौरी जिले (जम्मू-कश्मीर) के नौशेरा भेजे जा चुके हैं। दो और शवों को भी दिल्ली भेज दिया गया है।
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संभागीय आयुक्त ने कहा कि सभी घायलों की हालत 'स्थिर' है। तीर्थयात्रियों की स्थिति के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि माता वैष्णो देवी नारायण सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती 15 घायलों में से चार को छुट्टी दे दी गई और बाकी की हालत स्थिर है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराना है।