जम्मू-कश्मीर की पहली बहुउद्देशीय एवं राष्ट्रीय महत्व की उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना के डिजाइन में बड़ा बदलाव किया गया है। अब उज्ज दरिया का पानी पाकिस्तान जाने से 95 फीसदी तक रोक लिया जाएगा। इसके साथ ही परियोजना की लागत में भी ढाई हजार करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी गई है। पहले बिजली उत्पादन पर केंद्रित परियोजना को अब पानी के अत्यधिक प्रबंधन पर फोकस किया गया है। तकनीकी सलाहकार समिति ने इसकी मंजूरी दे दी है। हालांकि, नए बदलाव के तहत बिजली उत्पादन क्षमता घट जाएगी।
उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि उज्ज मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट की पहली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में 9167 करोड़ की लागत थी। इस डीपीआर के तहत परियोजना से 196 मेगावाट बिजली बनाई जानी थी। अब इसे बिजली के बजाय पानी प्रबंधन पर केंद्रित किया जा रहा है। ऐसे में लागत को बढ़ाकर 11907 करोड़ (2740 करोड़ वृद्धि) कर दिया गया है।
यह अनुमान वर्ष 2019 की योजना पर आधारित है। माना जा रहा है कि लागत में और बढ़ोतरी भी हो सकती है। वर्तमान में परियोजना क्रियान्वयन के लिए लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। विशेषज्ञ अपने-अपने सुझाव दे रहे हैं। सबसे बड़ा बदलाव इसके बिजली उत्पादन के पहलु में किया गया है। पर्यावरणीय क्षति को रोकने के लिए 196 मेगावाट की जगह अब महज 90 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रस्तावित की गई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने प्रारंभिक मंजूरी दे दी है, जिसे अब वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाएगा।
भद्रवाह से शुरू होकर 100 किमी दूर पाकिस्तान में मिलता है दरिया
उज्ज दरिया का उद्गम स्थल भद्रवाह के कैलाश पर्वत पर है। यहां से उज्ज दरिया जम्मू संभाग में 100 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पाकिस्तान के नैनकोट में जाकर मिलता है। पीएमओ कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद इस परियोजना के पूर्व के स्वरूप को बदलते हुए 95 फीसदी पानी के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।
पंचतीर्थी में है पांच नालों का संगम
सूत्र, दुनियारी, खड्ड, भिनी और तलैन नालों का पंचतीर्थी में संगम है। इसी जगह से इस परियोजना को तैयार किया जाना प्रस्तावित है। उज्ज बहुद्देश्यीय परियोजना से सांबा और कठुआ जिले के कंडी इलाकों की 24000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी। पहले जहां 16000 हेक्टेयर की सिंचाई का प्रावधान था वहीं अब इसे 8000 हेक्टेयर बढ़ा दिया गया है। इसमें बिलावर की लिफ्ट सिंचाई योजनाओं को भी शामिल किया गया है।
1927 में पहली बार शुरू हुआ था सर्वे
उज्ज मल्टी पर्पज परियोजना को लेकर पहली बार जांच अमेरिकी इंजीनियरों की ओर से वर्ष 1927 में की गई थी। वर्ष 1960 में इस परियोजना की विस्तृत जांच केंद्रीय जल आयोग की ओर से शुरू की गई। जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्रीय जल आयोग के साथ इस परियोजना की पहली डीपीआर वर्ष 1966 में तैयार की। जिसमें इससे 117 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य था।
2008 में इस परियोजना को तत्कालीन केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय परियोजना के रूप में मंजूरी दे दी गई। इसके बाद 2014 में इस परियोजना को लेकर कवायद फिर से तेज हुई, लेकिन परियोजना के स्वरूप को बदलने और 50 फीसदी पानी के इस्तेमाल को लेकर लिए गए फैसले के बाद इस परियोजना की डीपीआर को वर्ष 2020 में फिर बदल दिया गया। परियोजना में डूब क्षेत्र को 41 से 34.5 वर्ग किलोमीटर कर दिया गया। उधर, वर्ष 2022 में अब एक बार फिर परियोजना की रूपरेखा में बड़े संशोधन किए जा रहे हैं।(