कुलगाम के हसनपोरा में मारे गए दोनों युवक एक महीने पहले ही आतंकी संगठन में शामिल हुए थे। मारे गए एक आतंकी ने पुलवामा में पुलिस पार्टी पर हमला किया था। दूसरा भी कई वारदातों में शामिल था। आईजीपी ने बताया कि मौके से हथियार मिले हैं।
दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम में आठ घंटे से अधिक समय तक रविवार की रात चली मुठभेड़ में मारे गए दोनों आतंकी अल-बद्र के थे। दोनों पुलिसकर्मियों तथा नागरिकों पर हमले के मामले में शामिल थे। आतंक की दुनिया में दोनों का सफर एक महीने का रहा। दिसंबर महीने में दोनों ने बंदूक थामी थी। मारे गए आतंकियों से दो पिस्टल व गोलियां बरामद की गई हैं।
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आईजी विजय कुमार ने बताया कि इस महीने अब तक 13 आतंकियों का सफाया कर दिया गया है। कुलगाम में इस महीने यह दूसरी मुठभेड़ है। इससे पहले चार जनवरी को जिले के ओके इलाके में टीआरएफ के दो आतंकियों को मार गिराया गया था।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि अनंतनाग व कुलगाम जिले की सीमा पर हसनपोरा गांव में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर रविवार की शाम को घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान छिपे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। बार-बार की अपील के बाद भी आतंकी समर्पण को तैयार नहीं हुए।
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जवाबी कार्रवाई से मुठभेड़ शुरू हो गई। रात लगभग एक बजे दो आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली। मारे गए आतंकियों की शिनाख्त पुलवामा के अरिगाम के इमाद मुजफ्फर वानी व हसनपोरा के अब्दुल रशीद ठोकर के रूप में हुई है। ठोकर पांच दिसंबर और इमाद 20 दिसंबर को संगठन में शामिल हुआ था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दोनों सुरक्षा बलों व नागरिकों पर हमले करने वाले ग्रुप के सदस्य थे। इमाद 19 दिसंबर को पुलवामा में पुलिसकर्मी मुश्ताक अहमद वागे पर हमले में शामिल था, जिसमें मुश्ताक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ठोकर आतंकी बनने से पहले मददगार के रूप में काम कर रहा था और वह चित्रगाम में एक नागरिक पर हमले में शामिल रहा था।