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'मानवाधिकार के मूल्यों का सम्मान जरूरी'

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जम्मू यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल की ओर से बुधवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय विचार-गोष्ठी शुरू हुई। यूनिवर्सिटी के ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह सभागार में आयोजित इस विचार गोष्ठी के पहले दिन दो सत्र हुए।
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‘सत्याग्रह, आत्मानुशासन एवं गांधी-एक वैचारिकी’ नामक विषय पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सहयोग से विचार गोष्ठी आरंभ हुई। मुख्य अतिथि जस्टिस बालकृष्णन ने महात्मा गांधी के मूल्य और दर्शन पर अपने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद नीति थी, जिससे मानवाधिकार का वहां पर हनन हो रहा था। वहीं महात्मा गांधी ने स्वयं इसका विरोध किया था। लिहाजा मानवाधिकार का हर समाज में सम्मान होना चाहिए। उन्होंने समाज में भेदभाव को दूर करना तथा राष्ट्र में बेहतर वातावरण बनाने पर बल दिया।
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मानवाधिकारों के मुद्दे पर रखी राय

इससे पहले लॉ स्कूल के निदेशक और डीन प्रो. अरविंद जसरोटिया ने कहा कि भगवद्गीता तथा उपनिषदों से शिक्षा ग्रहण और इससे प्रेरित होकर महात्मा गांधी ने सत्याग्रह की महत्ता को उजागर किया।

अपने अध्यक्षीय भाषण में वीसी प्रो. मोहनपाल सिंह ईशर ने मानवाधिकार की महत्ता पर रोशनी डाली। वहीं गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद के वीसी डा. सुदर्शन अयंगर ने गोष्ठी के की-नोट को प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संयुक्त सचिव डा. जेएस कोचर ने विद्यार्थियों का आह्वान कि या कि वह गांधी के सिद्धांतों तथा आदर्शों को अपनाएं।

मानवाधिकार आयोग के सहायक निदेशक डा. एसके शुक्ला ने गोष्ठी के बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर आयोजन समिति की सचिव डा. सीमा रोहमेत्रा ने सबके प्रति आभार प्रकट किया।
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