जम्मू-कश्मीर में हो रहे पहले जिला विकास परिषद चुनावों को लेकर सियासी सियासी माहौल गरमा गया है। हर राजनीतिक दल अपने कोर मतदाताओं को लुभाने में जुट गया है। पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डेक्लेयरेशन (पीएजीडी) ने सोमवार को जहां पहलगाम में गुज्जर-बक्करवालों से मुलाकात के दौरान भाजपा पर निशाना साधते हुए क्षेत्र की सामाजिक संरचना बदलने का आरोप लगाया था, इसके जवाब में अगले ही दिन गृहमंत्री अमित शाह ने गुपकार गठबंधन को कटघरे में खड़ा करते हुए इसे गुपकार गैंग करार दे दिया।
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा गुपकार गठबंधन पर किए गए हमले को इस चुनाव से ही जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि मतों के ध्रुवीकरण के लिए ही भाजपा ने गुपकार गठबंधन को निशाना बनाया है। दरअसल यह चुनाव सीधे तौर पर भाजपा तथा गुपकार गठबंधन के बीच बताया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की ओर से सोमवार को मुस्लिम बस्तियों से गुज्जर समुदाय के लोगों को भगाकर डेमोग्राफी में बदलाव की भाजपा सरकार की कोशिशों संबंधी बयान के बाद अगले ही दिन दिल्ली में अमित शाह ने गुपकार गठबंधन पर हमला बोला।
कहा जा रहा है कि डीडीसी चुनाव में गुपकार गठबंधन से मिल रही चुनौतियों के मद्देनजर कम से कम जम्मू संभाग में मतदाताओं को एकजुट करने के लिए यह बयान दिया गया ताकि यहां की ज्यादातर सीटों पर गोलबंदी की जा सके। कश्मीर में भी चुनिंदा सीटों पर पार्टी का कब्जा हो सके। वहीं, अमित शाह के बयान के बाद नेकां के उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ तौर पर कहा कि जमीन खिसकते देख भाजपा में बौखलाहट है। इस वजह से गुपकार गैंग जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है।