करोड़ों खर्च कर करीब छह वर्ष के बाद स्वास्थ्य विभाग ने ट्रामा सेंटर की इमारत का निर्माण कार्य पूरा कर लिया, लेकिन इसके बावजूद ट्रामा सेंटर शुरू नहीं हो पा रहा है।
आज भी गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचे मरीजों को जीएमसी रेफर किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ट्रामा सेंटर में मशीनरी लगाने का काम चल रहा है।
इसके पूरा होने के बाद इसको शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
पांच करोड़ में बना ट्रामा सेंटर
वर्ष 2008 में ट्रामा सेंटर के निर्माण के लिए सरकार की तरफ से करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी। करीब
पांच करोड़ की राशि से ट्रामा सेंटर में मरीजों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए आधुनिक मशीनरी लगाई जानी थी।
साढ़े तीन करोड़ में ट्रामा लेवल में कर्मचारी तैनात किए जाने थे और 80 लाख रुपये में ट्रामा लेवल के लिए अस्पताल की पुरानी इमारत की नई सिरे मरम्मत की जानी थी। 2008 में ही सरकार की तरफ से इसके लिए 80 लाख रुपये की राशि कर दी गई थी।
राशि मिलने के बाद 2011 में पीडब्ल्यूडी ने जिला अस्पताल की इमारत की मरम्मत का कार्य शुरू किया। 2012 में पहले चरण का काम पूरा करने के बाद अस्पताल की इमरजेंसी को ट्रामा सेंटर में स्थानांतरित कर दिया।
जल्द शुरू किया जाएगा सेंटर
दूसरे चरण का कार्य 2012 से पहले पूरा किया जाना था, लेकिन इसको फरवरी 2014 में पूरा किया गया। इमारत बनने के बाद इसमें मशीनी लगाने का काम बाकी है।
कुछ मशीनरी लगा दी गई, लेकिन स्टाफ को प्रशिक्षण नहीं मिलने के कारण इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। हालात ये हैं कि ट्रामा सेंटर बनने के बाद भी लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
- इमारत बनने के बाद मशीनरी लगाने का काम बाकी है। कुछ मशीनरी लगा दी गई है, लेकिन इसको चलाने के लिए स्टाफ प्रशिक्षित नहीं है। स्वास्थ्य विभाग पूरा प्रयास कर रहा है कि मशीनरी लगाकर सेंटर को जल्द शुरू कर दिया जाए।
डॉ. अरुण शर्मा, चीफ मेडिकल आफिसर