मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घाटी में कश्मीरी पंडितों की ससम्मान वापसी के लिए प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनके लिए ट्रांजिट कालोनी बनेगी। इनमें 50 फीसदी कश्मीरी पंडित होंगे और शेष अन्य लोग। हालात ठीक होने पर वे अपने गांवों में चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैंने मिसाल दी थी कि कबूतर को बिल्ली के आगे नहीं छोड़ा नहीं जा सकता, लेकिन इसका उलटा अर्थ निकाला गया। कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि कश्मीरी मुसलमान को बिल्ली बना दिया।
सभी कश्मीरी मुसलमानों को आतंकवादी बना दिया गया। ऐसे भ्रामक प्रचार से बचना चाहिए। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को विधानपरिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के लिए हो रही चर्चा में हिस्सा लेते हुए यह कहा।
उन्होंने कहा कि एजेंडा आफ एलायंस पर भी विपक्ष हंगामा करता है। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में वर्किंग ग्रुप जिसमें नेकां, कांग्रेस, पीडीपी, पैंथर्स सभी शामिल थीं, ने सेना से भूमि वापसी, पावर प्रोजेक्ट की वापसी, अनुच्छेद 370 को बरकरार रखने और हालात सामान्य होने पर अफस्पा हटाने पर सहमति जताई थी।
एजेंडा आफ एलायंस में भी यह सारे विषय हैं। महबूबा ने कहा कि सुचेतगढ़ तथा अन्य रास्ते खुलेंगे तो यहां से बासमती और हार्डवेयर के पार्ट्स जाएंगे और वहां से पैसा आएगा। प्रधानमंत्री मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा कि एतबार है कि एक लीडर है जो जम्मू कश्मीर को मुसीबत से निकालने के लिए पाक से बात कर सकता है।
उमर ने जब दिल्ली को ज्वाइन किया था तब भी भाजपा की हुकूमत थी
- फोटो : Amar Ujala
उमर अब्दुल्ला पर हमला करते हुए कहा कि उमर ने जब दिल्ली को ज्वाइन किया था तब भी भाजपा की हुकूमत थी। आप क्यों भाजपा के साथ गए थे? उन्होंने कहा कि आरएसएस की विचारधारा को लेकर भी बातें की जाती हैं। किसी भी विचारधारा को कश्मीरियत कैसे स्वीकार कर सकती है। अपनी जड़ पर विश्वास करें।
पावर प्रोजेक्ट की वापसी के लिए थोड़ा समय दे दें, सकारात्मक परिणाम दिखेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा से गठबंधन का फैसला आसान नहीं था। जनमत का सम्मान करते हुए ही रियासत के विकास के लिए मुफ्ती साहब ने भाजपा से हाथ मिलाया। विपक्ष तो 1987 दोहराना चाहता था जब जनमत की हत्या की गई थी।
मुफ्ती साहब जम्मू और कश्मीर को लड़ाना नहीं चाहते थे और न ही हिंदू और मुसलमान के नाम पर सरकार बनाना चाहते थे। मुफ्ती के नेतृत्व में 2002 की सरकार काफी कामयाब थी। शांति प्रक्रिया की बहाली हुई थी, लेकिन 2005 के बाद यह प्रक्रिया थम गई। इसे फिर से बढ़ाने की जरूरत है।
सैनिक कालोनी केवल स्टेट सब्जेक्ट वालों के लिए होगी
विधानसभा की कार्रवाई के दौरान मौजूद सीएम और डिप्टी सीएम
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महबूबा ने कहा कि सैनिक कालोनी केवल स्टेट सब्जेक्ट वालों के लिए होगी। वर्ष 2011, 2012 व 2014 में हुई बैठकों में इसके लिए भूमि चिह्नित करने की बात कही गई, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ। उनके कार्यकाल में 21 अप्रैल को बैठक हुई जिसमें वे शामिल नहीं हुईं।
18 मई को डिवकाम ने कह दिया कि श्रीनगर, पुलवामा, बडगाम में इसके लिए जमीन उपलब्ध नहीं है। अनावश्यक रूप से इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि दो एम्स पर भी हंगामा किया गया, लेकिन विजयपुर व अवंतिपोरा में एम्स खोलने का केंद्र का पत्र आ चुका है। अब नीट पर हो हल्ला मचाया जा रहा है। यह साफ है कि राज्य के विशेष दर्जे पर नीट से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
रियासत की दोनों राजधानियां जम्मू और श्रीनगर स्मार्ट श्रेणी बनेंगी। अखिल भारतीय प्रतियोगिता के लिए दोनों शहरों को शामिल कर लिया गया है। एनएफएसए को लेकर भी हंगामा मचाया जाता है, जबकि इस पर भी पूर्ववर्ती सरकार ने ही दस्तखत किए हैं। इसके तहत लोगों को राशन मुहैया कराने के लिए मुफ्ती मोहम्मद सईद के नाम पर स्कीम शुरू की गई है। उम्मीद है कि पहली जुलाई से यह योजना शुरू हो जाएगी।