बाड़ी ब्राह्मणा। सिडको चौक हमेशा से ही काल का ग्रास बना हुआ है। इस चौक पर निरंतर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसके बावजूद म्यूनिसिपल कमेटी, राष्ट्रीय राजमार्ग अथारिटी और यातायात विभाग इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। नतीजन आए दिन लोगों के घर के चिराग बुझ रहे हैं।
सिडको चौक को लेकर अगर म्यूनिसिपल कमेटी की बात की जाए तो उनका कहना है कि उनके पास इस चौक को व्यवस्थित करने का कोई प्रावधान नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्ग ही इसके समाधान के लिए कोई योजना तैयार करे। यातायात विभाग का कहना है कि चारों ओर से गाड़ियों का निकलना अक्सर दुर्घटना को आमंत्रण देता है। सिडको चौक पर हो रहे हादसों को रोकने का हल किसी भी विभाग के पास नहीं है। भीड़ भाड़ वाली सड़क पर तेज रफ्तार गाड़ियां गुजरती हैं, लेकिन उनकी रोकथाम के लिए कोई विशेष नाके यातायात पुलिस द्वारा नहीं लगाए जाते। सिडको चौक पर दोपहिया वाहनों की क्रॉसिंग आम हो गई है। डिवाइडर तोड़कर गाड़ियां एक तरफ से दूसरी तरफ जाती हैं, जिनके लिए कोई रोकथाम नहीं है। दूसरी ओर म्यूनिसिपल कमेटी द्वारा सिडको चौक पर कोई भी पैसेंजर शेड नहीं है, ताकि लोग उसके भीतर खड़े हों। खुले में यात्री बसों का इंतजार करती हैं, जिससे हादसे हो जाते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जेबरा क्रॉसिंग, यातायात संकेतक की व्यवस्था वर्षों से दुरुस्त नहीं की जा रही हैं, जिसके चलते हादसे बढ़ रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्र से आने वाली गाड़ियों के लिए कोई भी मापदंड हाईवे पर चढ़ने के लिए नहीं बनाया गया है, जिससे हादसे हो रहे हैं। साफतौर पर बात की जाए तो लोग मर रहे हैं, लेकिन सिडको चौक के यातायात को व्यवस्थित करने की दिशा में किसी स्तर से कदम आगे नहीं बढ़ रहे हैं।