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आज का पत्थरबाज कल का आतंकी, माता-पिता को बच्चों का ध्यान रखना चाहिए: जीओसी

Sat, 03 Aug 2019 12:27 AM IST
Pranjal Dixit अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
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कमांडर केजेएस ढिल्लों
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घाटी में सेना की 15वीं कोर के कमांडर केजेएस ढिल्लों ने कहा कि आज का पत्थरबाज कल का आतंकी है। स्थानीय आतंकियों में से 83 प्रतिशत पहले पत्थरबाज थे। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों पर खास ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि अगर आपका बच्चा 500 रुपये के लिए सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी करता है तो वह कल का आतंकी है। माता-पिता को अपने बच्चों का ख्याल रखना चाहिए। अगर वह उन्हें पत्थरबाजी करने से नहीं रोकते हैं तो यह कहना गलत नहीं होगा कि उसे आतंकी बनने के एक साल के भीतर ही मार गिराया जाएगा।

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लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने कहा कि हमने कश्मीर में आतंकवाद का विश्लेषण किया है। कश्मीर का युवा जो बंदूक उठाकर आतंकी बनता है उनमें से 83 प्रतिशत आतंकियों का पत्थरबाजी का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड है। वर्ष 2019 में 7 प्रतिशत ऐसे आतंकी थे जिन्हें आतंकवाद में शामिल होने के 10 दिनों के भीतर मार दिया गया।

कहा कि नौ प्रतिशत ऐसे थे जिन्हें आतंकवाद में शामिल होने के एक महीने के भीतर मार गिराया गया। 17 प्रतिशत पहले तीन महीने, 36 प्रतिशत छह महीने और शेष ऐसे आतंकी थे जिन्हें आतंकवाद में शामिल होने के एक साल के भीतर मार गिराया गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक स्थानीय आतंकी की जीवन कितनी है।

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अब जो आतंकी लीडरशिप जिंदा है उसकी संख्या बहुत कम है

डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि हम घाटी में आतंकी संगठनों की मुख्य लीडरशिप को मार गिराने में सफल रहे हैं। अब जो आतंकी लीडरशिप जिंदा है उसकी संख्या बहुत कम है। अंसार गजवातुल हिंद का अब शायद ही कोई बड़ा आतंकी जिंदा होगा। अब उसके एक या दो आतंकी रह गए हैं। अल बदर लगभग पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। हिजबुल के कुछ बचे हैं। घाटी में कुल सक्रिय आतंकियों की संख्या में कमी हुई है।


उन्होने कहा कि जम्मू संभाग में भी सक्रिय आतंकियों की संख्या हाल ही में किश्तवाड़ में एक आतंकी के सरेंडर करने के बाद आठ पहुंच चुकी है। आतंकियों के ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया और कई को गिरफ्तार किया गया। इतना ही नहीं प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी और जेकेएलएफ जैसे संगठनों पर भी शिकंजा कसा गया। हाल ही में टेरर मानीटरिंग ग्रुप का गठन किया गया जिसे एडीजी सीआईडी देख रहे हैं। बड़ी संख्या में टेरर फं डिंग मॉड्यूल्स को निशाना बनाया गया।


उन्होंने कहा कि हम हमेशा उन युवाओं का स्वागत करने के लिए तैयार हैं जो आतंक की राह छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं। पिछले कुछ महीनों में परिवार वालों के सहयोग से हम कई युवाओं को वापस लाने में सफल रहे हैं और वह अपनी सामान्य जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आतंक का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की।
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इसलिए जवानों को यहां तैनाती के लिए लाया जा रहा है

डीजीपी ने कहा कि घाटी में भेजे गए अतिरिक्त सुरक्षा बलों के आंकड़े को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया जो वास्तव में उतना नहीं है। पिछले करीब 9 महीने से पंचायती चुनाव, निकाय चुनाव और लोकसभा चुनाव करवाए गए। अब अमरनाथ यात्रा चल रही है जिसके चलते यहां तैनात जवानों को आराम नहीं मिल पाया। इसलिए कुछ जवानों को वापस भेजा जा रहा है और कइयों को यहां तैनाती के लिए लाया जा रहा है। मीडिया में पेश किए गए आंकड़े सही नहीं हैं।

घाटी में इस वर्ष अब तक आतंकियों द्वारा आईईडी का उपयोग किए जाने के दस गंभीर प्रयास किए गए। इनमें से अधिकांश पुलवामा और दक्षिण कश्मीर के अन्य जिलों में हुए थे। आतंकियों द्वारा आईईडी से सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की चिंताजनक मोडस आपरेंडी के बारे में आईजीपी कश्मीर एसपी पाणि ने बताया कि आईईडी बनाने में एक्सपर्ट आतंकियों में से एक जैश के मुन्ना लाहौरी, कामरान और उस्मान को मार गिराया गया है।

सुरक्षा बलों के खिलाफ आईईडी का उपयोग करने वाले पांच मॉड्यूल्स का भंडाफोड़ किया गया और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। आईजी ने खुलासा किया कि जांच के दौरान यह सामने आया है कि आईईडी बनाने के लिए विस्फोटक सामग्री की चोरी की जा रही थी और सरकार ने पहले ही विस्फोटक के ट्रांसपोर्ट या उपयोग को नियमित करने के लिए कार्रवाई की है।
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