जुलाई 2013
यह वह साल था जब जम्मू-कश्मीर के रामबन में हिंसा भड़क उठी थी। इसके बाद अमरनाथ यात्रा रोक दी गई। जगह-जगह यात्रियों को बीच रास्ते में ही रुकना पड़ा था। तनाव के चलते पूरे कश्मीर में कर्फ्यू लगा दिया गया। इसी हिंसा के बाद रामबन के कलेक्टर का तबादला भी कर दिया गया है।
10 जुलाई साल 2015 में भारी बारिश यात्रा में बाधक बनी। खराब मौसम के कारण यात्रा रोक दी गई। इस दौरान पवित्र गुफा के आसपास, बालटाल और पहलगाम में बने आधार शिविरों के पहाड़ी मार्गों पर जमकर बारिश हुई।
इसके ठीक दो दिन बाद यानी की 12 जुलाई को खराब मौसम के कारण फिर से यात्रा को रोका गया। इसके बाद यात्रा शुरू हुई। शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। यात्रा कुछ दिन चली ही थी कि 8 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में भारी बारिश हुई। इसके बाद हुए भूस्खलन से जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद करना पड़ा। इसके साथ ही अमरनाथ यात्रा रोक दिया गया।
बाबा अमरनाथ यात्रा में बारिश ने करीब-करीब हर साल खलल डालने की कोशिश की। लेकिन शिवभक्तों का हौंसला बारिश के आगे हार मानने वाला नहीं। बात साल 2016 की है। 27-28 जुलाई को लगभग 800 श्रद्धालुओं ने 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में पूजा अर्चना की।
इसके बाद हुई भारी बारिश से गुफा तक जाने वाले दोनों मार्ग फिसलन से भर गए। जिससे यात्रा को रोकना पड़ा। साल 2017 में भारी बारिश और कई जगहों पर हुई भूस्खलन की घटनाओं से अमरनाथ यात्रा को रोकना पड़ा। इस दौरान जम्मू-श्रीनगर हाइवे को भी बंद कर दिया गया।
साल 2018 में अलगाववादियों ने कश्मीर बंद का आह्वान किया। इसके चलते अमरनाथ यात्रा दो दिन के लिए रद्द करने का फैसला लिया गया। आपको बता दें कि अलगाववादियों ने घाटी में बंद का आह्वान अनुच्छेद 35-ए के समर्थन में किया था। यह घटना 5 अगस्त की है।
इस बंद के आह्वान के चलते भगवती नगर यात्री निवास से तीर्थयात्रियों को आगे जाने नहीं दिया गया। साथ ही उधमपुर और रामबन में विशेष जांच चौकियां बनाई गईं। यह इसलिए किया गया ताकि तीर्थयात्रियों का जत्था जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर न पहुंचे।
वहीं इस समय तक 2.71 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में स्थित शिवलिंग के दर्शन कर लिये थे। वहीं बात अगर इस साल की करें मतलब 2019 अमरनाथ यात्रा की बात करें तो पांच बार बारिश ने यात्रा में खलल डाला है।
आपको बता दें कि साल 1991 से 1995 तक अमरनाथ यात्रा बंद रही थी। इसकी मुख्य वजह आतंकवादियों द्वारा दी जाने वाली धमकी थी। वहीं साल 2000 में अलगाववादियों द्वारा तीर्थयात्रियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी। इस दर्दनाक घटना में 21 हिंदू तीर्थयात्री, 7 मुस्लिम नागरिक, सुरक्षा बल के 3 अधिकारी समेत कुल 32 लोगों की जान गई थी।
20 जुलाई 2001 की वह घटना आज लोगों को आज भी झकझोर देती है। अमरनाथ मंदिर के पास शेषनाग में एक आतंकवादी ने तीर्थयात्री शिविर पर ग्रेनेड फेंके। इन दो विस्फोटों में 3 महिलाओं समेत करीब 13 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई थी। साथ ही 15 लोग घायल हुए थे।
साल 2002 में 30 जुलाई और 6 अगस्त को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक अल मंसूरियान के आतंकवादियों ने दो अलग-अलग घटनाओं को अंजाम दिया था।