जम्मू विश्वविद्यालय का इतिहास विभाग महाराजाओं के शासन काल में हुए महान कार्यों से लोगों को अवगत करवा रहा है। आईसीएचआर नई दिल्ली, सेंटर फॉर लद्दाख एंड जम्मू-कश्मीर स्टडीज एंड महाराजा गुलाब सिंह रिसर्च सेंटर, जम्मू के सहयोग से इतिहास विभाग 15 जून से तीन दिवसीय सेमिनार करवाएगा।
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केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल के पूर्व कुलपति और अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति रजनीश कुमार शुक्ला सहित अन्य संस्थानों के चेयरमैन व निदेशक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित होंगे। इसके अलावा देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों से इतिहास विभाग के शोधार्थी भी सेमिनार का हिस्सा बनकर महाराजा गुलाब सिंह के योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।
जम्मू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर श्याम नारायण लाल ने बताया कि महाराजा गुलाब सिंह सिर्फ जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर के महानायक थे। उनके शासन काल में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियां कैसी रही, इसके बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराजा पर देश भर के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में हजारों शोध हो रहे हैं, ताकि उनके शासन काल में किए गए कार्यों की लोगों को जानकारी मिल सके।
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डोगरा वंश से थे महाराजा गुलाब सिंह
डोगरा वंश से ताल्लुक रखने वाले महाराजा गुलाब सिंह का जन्म 17 अक्टूबर, 1792 में राजपूत परिवार में हुआ। उनके पिता किशोर सिंह जमवाल थे। जानकारी के अनुसार कई शासकों ने इस राज्य पर आक्रमण किया, लेकिन महाराजा ने सभी को पराजित कर दिया। उनका शासन समाप्त होने के बाद स्थिति बदलती गई। जिसके चलते पाकिस्तान रियासत के पीओजेके पर कब्जा किया है। राष्ट्रीय स्तर पीओजेके को पाक से मुक्त करने की नीति भी तैयार हो रही है।
अंग्रेजों के शासन के बाद बना जम्मू-कश्मीर राज्य
16 मार्च 1846 को अंग्रेजों का शासन खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य बनाया गया। महाराजा गुलाब सिंह ने इसे खरीदा था। इतिहासकारों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर सिर्फ अकेला राज्य है, जिस पर अंग्रेजों का राज नहीं चल सका। उनके शासन काल में पीओजेके का क्षेत्र जम्मू-कश्मीर के साथ था, जिसमें बालटिस्तान, बिंबरा और गिलगित आदि क्षेत्र हैं।