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सावधान! इस बार बढ़ेगी मच्छरों की फौज

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मौसम के बदलते मिजाज ने मच्छरों से पनपने वाली बीमारियों पर सोचने को मजबूर कर दिया है। विंटर सीजन में हो रही कम बारिश और चढ़ते पारे से इस बार मच्छरों की फौज में इजाफा होने की आशंका है।
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अमूमन अप्रैल में मच्छरों के खिलाफ छेड़े जाने वाला अभियान इस बार मार्च के अंत में शुरू करने की तैयारी की जा रही है। स्टेट मलेरियाजिस्ट डा. गुरजीत सिंह के अनुसार मौसम पर नजर रखी जा रही है। मलेरिया विंग ने सारी तैयारी कर रखी है।

मौसम के मुताबिक मच्छरों को पनपने से रोकने पर काम करना शुरू किया जाएगा। जम्मू संभाग में वर्ष 2014 में डेंगू से राहत रही थी, मगर वर्ष 2013 में डेंगू के रिकार्ड करीब चार सौ पाजिटिव मामले सामने आए थे।
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सर्दियों में कम बारिश और चढ़ता पारा करेगा परेशान

उस समय हालत यह हो गए थे कि आम लोगों में डेंगू की दहशत को कम करने के लिए सरकार को अक्तूबर 2013 में निजी लैबों में डेंगू बुखार की जांच के लिए रैपिड टेस्ट (एनएस1) पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था। एलिजा राइडर टेस्ट (1 जीएम) में ही डेंगू के पाजिटिव होने की पुष्टि होती है। रैपिड टेस्ट में अन्य बुखार से डेंगू पाजिटिव आ जाता है।

राज्य में एडिस एजिप्ती मच्छरों के अंडों से डेंगू के मच्छर पैदा होते हैं। डेंगू के डंक से शरीर में प्लेटलेट्स की भारी कमी हो जाती है। जिससे शरीर के विभिन्न हिस्सों में अचानक तेज दर्द होना, 105-107 डिग्री तक हाईग्रेड बुखार होना, मांसपेशियों में दर्द, नाक, मुंह और भीतरी हिस्सों से खून का रिसाव होना शुरू हो जाता है।

मरीज को समय पर उचित इलाज न मिलने से उसकी जान चली जाती है। पिछले साल भी डेंगू के दर्जनों पाजिटिव मामले आए थे। संभाग में कठुआ, सांबा, जम्मू, उधमपुर आदि जिले डेंगू और मलेरिया से अधिक प्रभावित रहे हैं।
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