भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लेकर हाईवे तक के इलाके को घुसपैठ और आतंकी हमलों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। दरियाई नालों पर कड़ी नजर रखने और जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे और नाकेबंदी कर चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था का दावा किया जाता है, लेकिन डेढ़ वर्ष में तीसरी दफा तमाम दावों की पोल ही खुल गई है।
आईजीपी जम्मू जोन दानेश राणा के अनुसार आतंकियों ने पिछले कुछ समय के दौरान हमलों के दौरान एक ही तरह की मोडस ओपरांडी अपनाई है। तड़के हाईवे पर आकर वह अपनी वारदात को अंजाम दे रहे हैं। लेकिन पिछले अनुभव से सबक लेते हुए आतंकियों के प्लान को नाकाम किया जा रहा है। इस बार भी शुरुआती फायरिंग के बाद से सुरक्षा बलों ने हालात काबू में रखे।
26 सितंबर 2013
तड़के साढ़े पांच बजे हीरानगर के जांडी इलाके में ऑटो हाइजैक कर तीन फिदायीन आतंकियों ने 6 बजकर 45 मिनट पर हीरानगर पुलिस थाने पर हमला बोल दिया। हीरानगर के बाद आतंकियों ने सांबा स्थित सैन्य शिविर पर हमला बोल दिया। इसमें एक सैन्य अफसर सहित पुलिस और सेना के आठ जवान व दो नागरिक मारे गए।