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यहां तीसरी बार हुआ फिदायीन हमला

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भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लेकर हाईवे तक के इलाके को घुसपैठ और आतंकी हमलों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। दरियाई नालों पर कड़ी नजर रखने और जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे और नाकेबंदी कर चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था का दावा किया जाता है, लेकिन डेढ़ वर्ष में तीसरी दफा तमाम दावों की पोल ही खुल गई है।
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आईजीपी जम्मू जोन दानेश राणा के अनुसार आतंकियों ने पिछले कुछ समय के दौरान हमलों के दौरान एक ही तरह की मोडस ओपरांडी अपनाई है। तड़के हाईवे पर आकर वह अपनी वारदात को अंजाम दे रहे हैं। लेकिन पिछले अनुभव से सबक लेते हुए आतंकियों के प्लान को नाकाम किया जा रहा है। इस बार भी शुरुआती फायरिंग के बाद से सुरक्षा बलों ने हालात काबू में रखे।

26 सितंबर 2013
तड़के साढ़े पांच बजे हीरानगर के जांडी इलाके में ऑटो हाइजैक कर तीन फिदायीन आतंकियों ने 6 बजकर 45 मिनट पर हीरानगर पुलिस थाने पर हमला बोल दिया। हीरानगर के बाद आतंकियों ने सांबा स्थित सैन्य शिविर पर हमला बोल दिया। इसमें एक सैन्य अफसर सहित पुलिस और सेना के आठ जवान व दो नागरिक मारे गए।
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दो साल से मार्च में हो रहा हमला

28 मार्च 2014
हीरानगर के तरनाह नाला पुल के नजदीक हाईवे पर बोलेरो वाहन को सुबह 4:45 बजे दो फिदायीन आतंकियों ने हाईजैक किया। खूनी खेल को अंजाम देने के बाद आतंकियों ने जंगलोट सैन्य शिविर को निशाना बनाने का प्रयास किया। सेना ने शाम छह बजे ऑपरेशन पूरा कर दिया। इस हमले में एक जवान और दो नागरिक मारे गए।

20 मार्च 2015
बीस मार्च 2015 के दिन फिदायीन हमला पुराने क्रम को दोहराने जैसा ही प्रतीत हुआ। सीमावर्ती इलाके से वाहन को हाइजैक करना हो या फिर हाईवे से होकर पुलिस थाने पर हमले को अंजाम देने का तरीका। पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान तीसरा फिदायीन हमला एक ही तरह की वारदात को आसानी से दोहराने का दुस्साहसिक क्रम है जिसे समय रहते रोकने में सुरक्षा तंत्र एक बार फिर नाकाम रहा।
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