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सेना में भर्ती के लिए युवाओं ने किए रिकार्ड आवेदन

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सेना में भर्ती होने के लिए रियासत के युवाओं में भारी उत्साह देखने को मिला। युवाओं ने दौड़ के अलावा अन्य भर्ती प्रक्रिया में पूरा दमखम दिखाया।
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सुजवां मिलिट्री स्टेशन में शुरू हुई भर्ती में इस बार 34,211 युवाओं ने आनलाइन आवेदन किया है, जो पिछली भर्तियों के मुकाबले काफी ज्यादा है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सेना ने युवाओं को जिलों के अनुसार अलग-अलग दिन बुलाया है।

शुक्रवार से शुरू हुई भर्ती के पहले दिन सांबा के 4343 युवाओं को बुलाया गया है। अखनूर में पिछले दिनों सेना की भर्ती के दौरान लाठीचार्ज होने के बाद सेना ने भर्ती की प्रक्रिया को और बेहतर करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
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डीडीजीआर ब्रिगेडियर जेएस जम्वाल ने बताया कि जिला स्तर पर बांटने से प्रक्रिया बेहतर तरीके से चल रही है। उन्होंने कहा कि 12 दिनों तक चलने वाली भर्ती रैली में जम्मू, डोडा, सांबा, कठुआ, उधमपुर, रामबन, राजोरी, रियासी, पुंछ, किश्तवाड़ जिलों के युवा भाग लेंगे, जिन्हें अलग-अलग दिन बुलाया गया है।

युवाओं को सेना में भर्ती के प्रति जागरूक करने के लिए सैन्य टीमों के अलावा प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। आर्मी मेला, स्कूल, कालेजों में युवाओं को सेना की भर्ती की पूरी जानकारी दी जा रही है।

सैन्य अधिकारियों का मानना है कि आनलाइन प्रक्रिया शुरू होने से युवाओं का क्रेज बढ़ेगा। साथ ही रैली में कितने युवाओं ने भाग लिया है, उसकी भी उन्हें जानकारी होगी। वह उसी ढंग से उन्हें अलग-अलग दिन बुला सकेंगे।

पहले ऐसा नहीं हो पाता था। रैली के दिन सुबह से ही सेना के स्टेशन के बाहर युवाओं का तांता लग जाता था। शुक्रवार को रैली के पहले दिन भी बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया, लेकिन भर्ती पूरे व्यवस्थित तरीके से हुई। भर्ती की पहली परीक्षा 1600 मीटर दौड़ में कई युवा छंट गए। उसके बाद अन्य प्रक्रियाओं से युवाओं को गुजरना पड़ा। 
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सेना के बैकलाग को भरने में भी मिलेगी मदद : डीडीजीआर

जम्मू-कश्मीर में पहली बार सेना की भर्ती में आनलाइन आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू हुई है। सेना के डिप्टी डायरेक्टर जनरल रिक्रूटनिंग (डीडीजीआर) ब्रिगेडियर जेएस जम्वाल ने कहा कि आनलाइन आवेदन का मुख्य उद्देश्य भर्ती में पारदर्शिता लाना है।

साथ ही सीमित ढांचे में बेहतर तरीके से भर्ती करना है। इसका लाभ मिला है और आने वाले समय में इस प्रक्रिया में और सुधार लाया जाएगा।

डीडीजीआर ने कहा कि पहले दौड़ और फिर मेडिकल के बाद लिखित परीक्षा होती है, लेकिन भविष्य में पहले लिखित परीक्षा लेने के बाद दौड़, फिजिकल जांच और मेडिकल की व्यवस्था की जाएगी। सेना में लंबे समय से खाली पदों का बैकलाग है।

इस पर ब्रिगेडियर जम्वाल ने कहा कि वर्तमान में नई प्रक्रिया के तहत तमाम खाली पदो को भरा जा रहा है। सूचकांक 2011 के तहत प्रत्येक राज्य की आबादी की औसत से उनका कोटा बांटा गया है।

इसके तहत पूरे पदों को भरा जा रहा है और भविष्य में बैकलाग को भरने में भी मदद मिलेगी।सेना की भर्ती में अन्य राज्यों के मुकाबले रियासत के युवाओं में फिजिकल फिटनेस की भी कमी आ रही है।

ब्रिगेडियर जम्वाल ने बताया कि पड़ोसी राज्य पंजाब के युवा ज्यादा मजबूत कद काठी के हैं और वहां भर्ती में प्रतिस्पर्धा ज्यादा देखने को मिल रही है, जबकि यहां युवाओं में दमखम उतना नजर नहीं आ रहा, जितनी अपेक्षा है।

जम्मू संभाग में सांबा, कठुआ और कंडी क्षेत्र के युवा अन्य जिलो से ज्यादा बेहतर हैं। भर्ती की संख्या के संबंध में उन्होंने कहा कि इसमें कोई लिमिट नहीं है। जितने युवा कसौटी पर खरा उतरेंगे, उन्हें सेना में नौकरी मिलेगी।

उन्होंने कहा कि भर्ती में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है और युवा या उनके अभिभावक किसी दलाल के चक्कर में न पड़ें। कई स्तर पर जांच होने के कारण इसमें किसी प्रकार से सिफारिश नहीं चलेगी।

भर्ती में डोडा, भद्रवाह, रामबन, किश्तवाड़ से कम युवाओं के पहुंचने के संबंध में ब्रिगेडियर ने कहा कि उस क्षेत्र में टेरिटोरियल आर्मी में भी भर्ती चल रही है।

काफी युवा वहां भाग ले रहे हैं। उन्होने स्वीकार किया कि रियासत के लोग सेना के अन्य विंग में जाने की बजाए टेरिटोरियल आर्मी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि रियासत के बाहर न जाना पड़े।
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