औद्योगिक क्षेत्र से सटे इलाकों में लगातार सामने आए रहे बच्चों की रहस्यमय बीमारी के मामलों के बाद प्रदूषण के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इसके मुताबिक कठुआ औद्योगिक क्षेत्र की हवा रियासत में सबसे अधिक जहरीली हो गई है।
कई वर्षों से मासिक स्तर पर की गई मॉनीटरिंग में खुलासा हुआ है कि प्रदूषण के मानदंडों का दम भरने वाली औद्योगिक इकाइयों ने बिना किसी रोक-टोक के रिहायशी इलाकों की फिजा में जहर घोलने का काम किया है।
यहां तक कि पिछले कुछ वर्षों में सब्सिडी गटक कर मुंह फेर लेने वाले औद्योगिक निवेशकों ने भी पर्यावरण के साथ जमकर खिलवाड़ किया है।
हानिकारक सीसा धातु की इकाइयां सबसे ज्यादा
वर्तमान में गिनी-चुनी पेस्टीसाइड इकाइयां ही कठुआ में काम कर रही हैं, लेकिन इन्हें किन परिस्थितियों और मानकों के आधार अनुमति दी गई, यह भी बड़ा सवाल है।
बीते एक दशक में कठुआ शहर से सटे औद्योगिक क्षेत्र में मिश्र धातुओं की आधा दर्जन के लगभग औद्योगिक इकाइयां चलती रहीं। इनमें सीसा धातु की इकाइयां सबसे अधिक थीं।
पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो सीसा धातु बेहद हानिकारक है और इसके इस्तेमाल के काफी साल बाद तक भी इसका असर देखा जाता है। यहां तक कि यदि सीसा धातु की माइक्रोग्राम मात्रा भी हवा के जरिए शरीर के अंदर जाए, तो किसी के भी जान पर बन सकती है।
पीएम10 की मात्रा 139 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के उच्च अधिकारी के मुताबिक कठुआ औद्योगिक क्षेत्र के पिछले एक साल के आंकड़ों में आरएसपीएम या पीएम10 की मात्रा 139 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज की गई।
प्रदूषण नियंत्रण के मानकों के अनुसार इसे अधिकतम 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक होना चाहिए था। जम्मू के ज्यूल चौक, बाड़ी ब्राह्मणा औद्योगिक क्षेत्र सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से यह आंकड़े कहीं अधिक हैं।
एसपीएम 200 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक होना चाहिए, जबकि इसे पिछले एक साल के आंकड़ों में 270 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से सप्ताह में दो दिन चौबीस घंटे जांच की जाती है, जिसके लिए विभिन्न जगहों पर उपकरण भी स्थापित किए गए हैं।
कितना घातक है आरएसपीएम?
अंतर्राष्ट्रीय कैंसर रिसर्च एजेंसी और वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार आरएसपीएम वायु प्रदूषण में सबसे जानलेवा साबित हो सकते हैं।
इनमें फेफड़ों और रक्त धमनियों में समाने की क्षमता होती है, जिससे डीएनए उत्परिवर्तन, दिल का दौरा पड़ना और समय से पहले मौत होना आम बात है। कठुआ के बच्चों में रहस्यमय बीमारी के लक्षणों में भी कुछ ऐसा ही सामने आया है।
स्वास्थ्य विभाग की मानें तो कुछ बच्चे जहां दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं, वहीं अन्य बच्चों में शारीरिक विकृतियां पाई जा गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी इसे डीएनए उत्परिवर्तन मान रहे हैं।