ग्राउंड रिपोर्ट : सरहद पर स्वाद की अनूठी इबारत
- बिहार के 25 हजार से अधिक श्रमिकों की मेहनत से तैयार होता है चावल
- लाजवाब स्वाद के दम पर वैश्विक बाजार का बादशाह बना बासमती
अखिलेश शर्मा
जम्मू। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जम्मू-कश्मीर के खेतों में इन दिनों बासमती धान महक रहा है। यह महक सिर्फ पक रही धान की सुनहरी बालियों की नहीं, बल्कि भारत के दो सुदूर छोरों के अटूट रिश्ते की भी है।
जम्मू के डुग्गर क्षेत्र की विशेष उपजाऊ माटी जब बिहार के मिथिलांचल यानी करीब दो हजार किलोमीटर दूर से आने वाले श्रमिकों के कड़े परिश्रम (पसीने) से मिलती है, तो दुनिया का बेहतरीन और खुशबूदार बासमती चावल पैदा होता है।
चिनाब नदी से निकलने वाली रणबीर नहर के हिमालयी पानी से सींची जाने वाली इस जमीन पर आरएस पुरा (रणबीर सिंह पुरा) का बासमती-370 और 1121 अपनी लंबी बनावट और लाजवाब स्वाद के दम पर वैश्विक बाजार का बादशाह बना हुआ है।
आरएस पुरा, अखनूर, सुचेतगढ़, बिश्नाह और मढ़ जैसे सीमावर्ती इलाकों में धान का सीजन आते ही बिहार के मिथिला क्षेत्र (दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा और मधेपुरा) से हर साल 25,000 से अधिक खेतिहर श्रमिक जम्मू (डुग्गर क्षेत्र) पहुंचते हैं।
स्थानीय किसानों के अनुसार, धान की बारीक रोपाई और कटाई के पारंपरिक हुनर में मिथिला के इन श्रमिकों का कोई मुकाबला नहीं है। स्थानीय डोगरा भूस्वामियों और मिथिला इन कामगारों के बीच का यह रिश्ता सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक मेल-मिलाप बन चुका है।
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60,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल
में सुनहरी फसल का साम्राज्य
जम्मू संभाग के प्रमुख मैदानी जिलों (जम्मू, सांबा और कठुआ) में बासमती चावल की खेती लगभग 60 से 63 हजार हेक्टेयर (करीब 1.5 लाख एकड़) भूमि पर की जाती है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस बेल्ट में सालाना करीब 20 लाख क्विंटल (2 लाख मीट्रिक टन) बासमती धान का उत्पादन होता है। आरएस पुरा बेल्ट को साल 2016 में मिले जीआई टैग (ज्योग्राफीकल इंडीकेशन) ने इसे एक विशिष्ट वैश्विक पहचान दी है, जिससे यहां की पारंपरिक किस्म बासमती-370 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में संरक्षण मिला हुआ है।
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45 करोड़ का कारोबार, अमेरिका तक हो रहा निर्यात
जम्मू की स्थानीय अर्थव्यवस्था में बासमती चावल का बड़ा योगदान है। किसानों के स्तर पर इसका सालाना प्रत्यक्ष कारोबार 45 करोड़ रुपये से अधिक का है, जबकि राइस मिलों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और ब्रांडेड पैकेजिंग को मिलाकर यह टर्नओवर और बढ़ जाता है। दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों में भेजा जाता है। वहीं हर साल करीब 5 लाख क्विंटल चावल खाड़ी देश, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और कई यूरोपीय देशों में भी निर्यात किया जाता है। फिलहाल फुटकर बाजार में क्वालिटी के मुताबिक 120 से लेकर 350 रुपये प्रति किलो बिक्री होती है।
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जम्मू संभाग के बासमती को जीआई टैग हासिल है। इसे बड़ी मात्रा में निर्यात किया जा रहा है। देश के अलावा विदेशोंं में भी यहां के चावल की एक अलग पहचान है।
- अनिल गुप्ता, कृषि निदेशक, जम्मू-कश्मीर