एनएफएसए पर विधानसभा में सरकार को किरकिरी का सामना करना पड़ा। इस मुद्दे पर वह न केवल विपक्ष के निशाने पर रही, बल्कि अपनों का भी हमला झेलना पड़ा।
पीडीपी-भाजपा सदस्यों ने इसकी व्यवस्था पर अंगुली उठाते हुए स्थिति स्पष्ट करने को कहा। सत्ता पक्ष के सदस्यों में इतना गुस्सा था कि वे अपने पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों के हस्तक्षेप करने के बाद भी बोलने से नहीं रुके।
सदन में नेकां सदस्य अली मोहम्मद सागर के एनएफएसए से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए सीएपीडी मंत्री चौधरी जुल्फिकार अली को सदस्यों के तीखे हमले झेलने पड़े। सागर ने तो सरकारी व्यवस्था पर अंगुली उठाई ही, सरकार में शामिल पीडीपी विधायक मोहम्मद अशरफ मीर, यावर मीर व अब्दुल मजीद पाडर, भाजपा के आरएस पठानिया ने भी सीएपीडी विभाग की खामियों को उजागर किया।
...बोलने दो इनकी मिनिस्ट्री जल्द गई है
विधानसभा में अपनी बात रखते विधायक
- फोटो : Nikhil Mehta
सदस्यों का गुस्सा इस बात पर था कि उपभोक्ताओं के नाम काटने का आधार क्या है, यह किसी को नहीं पता। सरकार के दावे के विपरीत उपभोक्ताओं को राशन नहीं मिल रहा है। अशरफ मीर ने आरोप लगाया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में दुर्भावना से नाम काटे गए हैं।
यावर मीर ने राफियाबाद क्षेत्र में कार्डधारकों को चीनी न मिलने का मुद्दा उठाया। साथ ही कम राशन देने की भी बात कही। आरएस पठानिया ने भी नाम काटे जाने की बात कहते हुए कहा कि इसका आधार क्या है, यह अब तक नहीं पता है। इस व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है।
पीडीपी-भाजपा विधायकों के हमले को देखते हुए विपक्ष ने चुटकी लेते हुए कहा कि जब सत्ता पक्ष का यह हाल है तो विपक्ष की बात ही कौन करे। नेकां विधायक देवेंद्र सिंह राणा ने भी यह मुद्दा उठाया। विपक्ष ने सदन में शेम-शेम के नारे लगाते हुए सरकार से जल्द से जल्द इसमें सुधार की मांग उठाई।
पीडीपी सदस्य मो. अशरफ मीर इस मुद्दे को लेकर इतने अधिक गुस्से में थे कि वे सीएपीडी मंत्री पर सीधे आरोप लगा रहे थे। उनकी आवाज भी काफी तेज थी। पीडीपी के वरिष्ठ मंत्रियों ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। इस पर सीएपीडी मंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि बोलने दो, इनकी मिनिस्ट्री जल्द गई है।