सीमावर्ती इलाकों में इस्तेमाल होने वाला सोशल मीडिया उस पार बैठे आतंकियों और पाक खुफिया एजेंसियों के लिए मददगार साबित हो रहा है। आतंकियों और पाक खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने वाले ओवरग्राउंड (ओजी) वर्करों द्वारा सोशल मीडिया से इस तरफ की कई जानकारियां उस पार साझा हो रही हैं। ह्वाट्सएप ग्रुप में कई पाकिस्तानी तक शामिल हैं, लेकिन इसके बारे किसी को पता नहीं चल पाता।
सूत्रों के अनुसार भारतीय कंपनियों के सिम कार्ड पर ओजी वर्कर ने अपने अकाउंट बनाए हैं। इन नंबरों की जानकारी उस पार पहुंचाई गई है। जब इस नंबर पर ह्वाट्सएप चलना शुरू हो जाए, तो शुरू करने के बाद नंबर को कालिंग के लिए इस्तेमाल करना बंद कर दिया जाता है। उक्त नंबर को सिर्फ ह्वाट्सएप के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसी नंबर से फिर एक ह्वाट्सएप ग्रुप बनाया जाता है, जिसका नाम इस तरह से रखा जाता है कि उसको देखने वाले को लगे कि यह उसके ही आसपास रहने वाले किसी शख्स का बनाया गया ग्रुप है।
किसी हिंदु संगठन का नाम दिया जाए या फिर किसी को यारी दोस्ती का नाम दिया जाएगा। एक बार जब ग्रुप बन गया तो उसमें सब जानकारियां साझा करने लगते हैं। ग्रुप बनाने वाला पाकिस्तान में बैठकर इस तरफ की जानकारियां प्राप्त कर लेता है। जबकि ग्रुप में शामिल होने वाले लोगों को पता ही नहीं चल पाता कि वह ग्रुप एडमिन को जानते हैं या नहीं। हालांकि इसमें कुछ ग्रुप छोड़ भी देते हैं, लेकिन कई निरंतर बने रहते हैं और इस बात की परवाह नहीं करते कि वह किस ग्रुप में हैं।