पाकिस्तान से घुसपैठ की कोशिशों को विफल करने में अहम भूमिका निभाने वाले सेना के प्रशिक्षित कुत्ते अब आतंकियों के निशाने पर हैं। जम्मू कश्मीर में भारत-पाक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इन कुत्तों की भूमिका किसी इस्राइली उपकरण से कम नहीं है।
प्रशिक्षित कुत्ते जवानों को पाकिस्तानी बार्डर एक्शन टीम की बिछाई बारूदी सुरंगों से बचाते हैं और आतंकियों की हलचल पर तुरंत चौकन्ना भी करते हैं। चूंकि घुसपैठ की राह में ये प्रशिक्षित कुत्ते सबसे बड़ी बाधा हैं इसलिये आतंकी अब उन्हें निशाना बना रहे हैं।
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सेना के अधिकारी मानते हैं कि इनकी मदद के बगैर एलओसी और बार्डर पर पेट्रोलिंग भी मुश्किल है। कुछ अग्रिम चौकियों पर जवानों ने जंगली कुत्तों को भी प्रशिक्षित कर अपना सहयोगी बना लिया है।
उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के टंगधार में इस माह आतंकियों ने मानसी नामक प्रशिक्षित कुत्ते की हत्या कर दी। मानसी की सूचना पर पहले घुसपैठ की कोई कोशिशें विफल की गईं थी। इस प्रशिक्षित डाग के साथ उसके प्रशिक्षक जवान बशीर भी आतंकी हमले में शहीद हो गए। हाल के दिनों में आधा दर्जन प्रशिक्षित कुत्तों को निशाना बनाया गया है।
आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने में मदद के लिए सेना ने कुत्तों के प्रशिक्षण के लिए कश्मीर में अलग यूनिट बनाई है। एलओसी और बार्डर इलाके में 600 से अधिक प्रशिक्षित डाग की तैनाती है।
कश्मीर संभाग में हाल के दिनों में घुसपैठ की 11 कोशिशें विफल की गईं जिसमें 19 आतंकी मारे गए। सभी आपरेशन में इन प्रशिक्षित कुत्तों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। सेना ने अब इन कुत्तों की सुरक्षा के लिए गश्त में जवानों की संख्या बढ़ाई है।