चुनाव में खलल के लिए आतंकी संगठन बड़े हमले का साजिश बुन रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय और रियासत सरकार को अगाह किया है। एजेंसियों ने आतंकी संगठनों की साजिश के बारे में चुनाव आयोग को भी सूचना दी है।
सूचनाओं के अनुसार आतंकी दोतरफा हमले की तैयारी में हैं। इसके तहत सीमा पार से घुसपैठ के बाद फिदायीन हमले की भी आशंका है। घाटी में पहले से सक्रिय आतंकियों को लश्कर-ए तैयबा के कमांडरों से हमले के लिए संदेश मिले हैं।
सूचना के बाद एलओसी पर सेना तथा बार्डर पर बीएसएफ को सतर्क कर दिया गया है। घाटी के रिहायशी इलाकों में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है।
60 आतंकी घुसपैठ करने में सफल रहे
गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मतदान 25 नवम्बर से 20 दिसम्बर तक है तथा 23 दिसम्बर को मतगणना होने वाली है। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार चुनाव की संभावना के मद्देनजर आतंकी संगठनों ने अगस्त माह से ही सक्रियता बढ़ा दी थी।
यही कारण है कि उस दौरान लगभग हर दिन एलओसी और बार्डर पर सीजफायर का उल्लंघन होता रहा। सेना और बीएसएफ ने माकूल जवाब दिया लेकिन माना जाता है कि कम से कम 60 आतंकी सीजफायर की आड़ में घुसपैठ करने में सफल रहे।
सितम्बर महीने में बाढ़ ने श्रीनगर समेत घाटी के कई हिस्सों को चपेट में लिया लेकिन इस दौरान भी आतंकियों की सक्रियता जारी रही। कुपवाड़ा इलाके में सेना और आतंकी संगठनों में मुठभेड़ भी हुई।
लश्कर ने बाढ़ से तबाह हुए लोगों के बीच पैठ बनाई
बाढ़ ने कश्मीर के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर को भी चपेट में लिया। इससे लश्कर-ए तैयबा को पीओके में भर्ती अभियान चलाने को मौका मिला। बाढ़ ने सैकड़ों लोगों को बेघर कर दिया और युवकों के रोजगार छिन गए।
कश्मीर और पीओके में लश्कर-ए तैयबा बाढ़ से तबाह हुए लोगों के बीच राहत के बहाने पैठ बनाई। बाढ़ से बेरोजगार युवकों को आतंकी गतिविधियों के लिए भर्ती करने में लश्कर-ए तैयबा को अनुकूल माहौल मिला है।
पीओके में पहले से आतंकियों के प्रशिक्षण के लिए 42 कैंप चल रहे हैं जिसमें 1600 से अधिक आतंकी प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। पाकिस्तानी सेना सीजफायर का उल्लंघन कर कवर फायर देकर इन्हें भारतीय सीमा में धकेलने की साजिश में जुटा है।
आतंकी इस माहौल का फायदा उठाना चाहते हैं
सूत्रों का मानें तो कश्मीर घाटी में बाढ़ के बाद से दो दर्जन से अधिक युवक लापता हैं। इनमें से कुछ के आतंकी संगठन में भर्ती होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हाल में लश्कर-ए-तैयबा ने घाटी में मौजूद अपने सुप्त आतंकियों को सक्रिय किया है।
मुजफ्फराबाद में जमात उद दावा के चीफ हाफिज सईद ने डेरा डालकर आतंकियों का संचालन शुरू किया है। बडगाम के छत्तरगाम में सेना की गोली से दो लोगों की मौत के बाद एक बार फिर से अफस्पा और सेना की मौजूदगी के विरोध में आंदोलन तेज है। आतंकी संगठन इस माहौल का फायदा उठाना चाहते हैं।