आतंकी संगठन पुलिस की व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र में भी सेंध मार रहे हैं। जेलों से लेकर बाहर तक आतंकी संगठनों ने सांठगांठ बना रखी है। इसमें पुलिसकर्मी तक शामिल हैं। अभी एक हफ्ता पहले ही अनंतनाग के रहने वाले एक पुलिस कर्मी को गिरफ्तार किया गया, जो आतंकियों तक हथियार पहुंचाने और अन्य तरह की मदद पहुंचाता था। अब जम्मू की कोट भलवाल जेल में एक ऐसे आतंकी से मोबाइल फोन बरामद हुआ, जो जेल में बैठकर पुंछ में होने वाली मुठभेड़ में शामिल आतंकियों को ऑपरेट कर रहा था।
ऐसा पहली बार नहीं है। पिछले कुछ समय नजर डालें तो साफ दिखता है कि किस तरह से आतंकी पुलिस तंत्र में घुसकर अपना नेटवर्क चला रहे हैं। 21 अक्तूबर को पुलिस अशफाक मलिक को अनंतनाग के वेरीनाग से गिरफ्तार करके लाई। अशफाक लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के लिए काम करता था। वह फलाएं मंडाल के सुहांजना में पाकिस्तान द्वारा ड्रोन से फेंके गए हथियार मामले में भी शामिल था। अब तीन दिन पहले ही जम्मू की कोट भलवाल जेल से एक पाकिस्तानी आतंकी जिया मुस्तफा को पकड़ा गया। वह जेल से अपने मोबाइल के जरिये पुंछ मुठभेड़ को ऑपरेट कर रहा था। आतंकी संगठन पुलिस और जेल व्यवस्था में घुसकर अपने नेटवर्क को चला रहे हैं, जो पुलिस और जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं।
12 जनवरी 2020 को पुलिस ने कश्मीर के कुलगाम से डीएसपी देविंदर सिंह को हिजबुल आतंकी के साथ पकड़ा था, जबकि जम्मू की कोट भलवाल सेंट्रल जेल, श्रीनगर की सेंट्रल जेल में आतंकियों से मोबाइल फोन मिल चुके हैं। इसी साल जम्मू की सेंट्रल जेल में दो बार आतंकियों से मोबाइल फोन मिला है। इन घटनाओं से कहीं न कहीं पुलिस की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। आतंकी संगठन पुलिस की व्यवस्था में घुसकर इनके लोगों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पुलिस कर्मियों से संपर्क साध कर उनके जरिए काम कराने की फिराक में है। वह जेल की सुरक्षा में भी सेंध लगा रहे हैं। इसके लिए बड़े स्तर पर पुलिस कर्मियों को पैसा देने का आश्वासन दिया जा रहा है। आतंकी संगठन उन पुलिस कर्मियों से संपर्क साधने की कोशिश में हैं, जिनके पूर्व में किसी न किसी रिश्तेदार या परिवार के सदस्य का आतंकवाद से लिंक रहा हो।