रियासी के कंडा इलाके में श्रद्धालुओं से भरी बस में आतंकी हमले के बाद से दहशतगर्दों की धरपकड़ के लिए तलाशी अभियान मंगलवार को भी जारी रहा। लेकिन हमले के 48 घंटे बाद भी कोई सुराग नहीं लग पाया है। पुलिस और सेना के जवान जंगलों को खंगाल रहे हैं।
ड्रोन की भी मदद ली जा रही है। सुरक्षाबलों ने कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है। कटड़ा-शिवखोड़ी के बीच में कंडा और चंडी मोड़ इलाके में घना जंगल है। इस कारण सुरक्षाबलों को सर्च ऑपरेशन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
हमले में 9 लोगों की हुई थी मौत, 41 घायल
नौ जून को शाम छह बजे आतंकियों ने शिवखोड़ी धाम से कटड़ा जा रही श्रद्धालुओं की बस पर हमला कर दिया था। इसमें नौ लोगों की मौत और 41 घायल हुए थे। हमले के बाद से ही सुरक्षाबल आतंकियों की तलाश में लगे हुए हैं। वारदात स्थल के साथ लगता जंगल काफी घना है, जिससे सुरक्षाबल अभियान को सतर्कता से चला रहे हैं, ताकि कोई नुकसान न उठाना पड़े।
हमले के कुछ समय बाद कंडा से गुजरा तेज रफ्तार ईको वाहन
कंडा में श्रद्धालुओं की बस पर हमले के बाद से आतंकियों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। वहीं, कंडा में स्थापित वन विभाग के नाके पर लगे सीसीटीवी कैमरों में हमले के कुछ समय बाद एक ईको वाहन तेज रफ्तार से वहां से गुजरता दिखाई दिया है।
इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि आतंकी इसी वाहन की मदद से भागने में सफल रहे हैं। यह वाहन कंडा चौक से त्रियाठ की तरफ गया था। यहां से त्रियाठ 15 किलोमीटर दूर है। त्रियाठ के मुख्य पुल को पार करते ही जिला राजोरी का क्षेत्र शुरू हो जाता है। पुलिस ईको वाहन के बारे में पता लगाने में जुटी है।
तीन दशक पहले कंडा, चंडी मोड़ से होती थी आतंकियों की क्रॉसिंग
जानकारी के अनुसार, तीन दशक पहले आतंकवाद के दौर में कंडा और चंडी मोड़ का क्षेत्र आतंकियों के लिए क्रॉसिंग का मुख्य रास्ता होता था। सुंदरबनी और नौशेरा सेक्टर से बाॅर्डर पार कर आने वाले आतंकी इसी रास्ते से माहौर का रुख करते थे। घटनास्थल से पांच किलोमीटर दूर भारख में सेना का एक नाका होता था।
ऐसा ही नाका कंडा में होता था, जो अब नहीं हैं। 10 साल पहले शाम छह बजे के बाद शिवखोड़ी से रियासी, कटड़ा और पौनी की तरफ कोई वाहन नहीं भेजा जाता था, लेकिन 2013-14 में जिले के आतंकवाद मुक्त होने बाद परिस्थितियां बदल गईं हैं। रविवार को हुए आतंकवादी हमले के बाद जिले में फिर से आतंकवाद के जिंदा होने की आशंका है।