संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जीएमसी की टेलीफोन एक्सचेंज बैठने के बाद नए इमरजेंसी ब्लाक के एसी भी जवाब दे गए हैं। भीषण गर्मी और उमस से इमरजेंसी में स्टाफ के साथ मरीज बेहाल हैं। गर्मी से निजात पाने के लिए निजी पंखों या पंखियों का सहारा लिया जा रहा है।
अस्पताल में सोमवार तीसरे दिन भी एक्सचेंज को बहाल नहीं किया जा सका। गिने चुने कनेक्शन अस्थायी तौर पर चलाए गए हैं। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस पर अगर आपात हालात बनते हैं तो मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
अस्पताल की इमरजेंसी में गत शाम से एसी प्लांट के बैठ जाने से गर्मी और उमस का आलम है। इमरजेंसी में मिनी आईसीयू में सड़क हादसों और अन्य दूसरे गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर या एंबोसेट पर रखा जाता है, लेकिन पूरी तरह से बंद इमरजेंसी में बिना एसी के ऐसे मरीजों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। पिछले दो दिन से एसी को चलाया नहीं जा सका है।
अमूमन खचाखच भरे रहने वाले नए इमरजेंसी ब्लाक में मरीजों के साथ स्टाफ की हालत भी गर्मी से पतली हो रही है। खासकर रात के समय मरीजों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। ऐसे में कई तीमारदार अपने मरीजों को लेकर निजी अस्पतालों का रुख भी कर रहे हैं।
अस्पताल के एयर कंडिशनर यूनिट की एईई रीटा रिहान के अनुसार बिजली सप्लाई की समस्या से एसी के तीन कंप्रेशर जल गए हैं। एसी प्लांट को जल्द बहाल करने के लिए दिल्ली स्थित संबंधित कंपनी को लिखा गया है। बिजली समस्या के कारण दिक्कतें आ रही हैं।
इस बीच सोमवार तीसरे दिन भी जीएमसी की टेलीफोन एक्सचेंज बहाल नहीं हो पाई। इमरजेंसी में कुछ लाइन को बहाल किया गया है, लेकिन अस्पताल के अन्य यूनिटों में भीतरी एक्सचेंज से जुड़े डेढ़ सौ से अधिक कनेक्शन बंद हैं। एक्सचेंज को लेकर विभागीय अधिकारियों की बैठक भी बुलाई गई। जिसमें आगामी परचेज कमेटी में इस मुद्दे को रखने का फैसला किया गया।