मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अपने भाई तसद्दुक मुफ्ती को पार्टी की कमान सौंप सकती हैं। फिलहाल महबूबा ही पार्टी अध्यक्ष भी हैं। पार्टी पर मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति के तहत तसद्दुक को पार्टी और सरकार में ज्यादा महत्व दिया जाने लगा है। तसद्द्ुक अनंतनाग सीट से पीडीपी के उम्मीदवार भी हैं।
हिंसा के कारण चुनाव आयोग ने मतदान फिलहाल टाल दिया है। अगर यह चुनाव ज्यादा दिनों के लिए टलता है तो तसद्दुक को मंत्री पद से भी नवाजा जा सकता है। पीडीपी कोटे की एक सीट मंत्रिमंडल में खाली है। लिहाजा तसद्दुक की ताजपोशी में कोई दिक्कत भी पेश नहीं आएगी।
पीडीपी सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने तसद्दुक के सीएम का सलाहकार बनाकर मंत्री पद का दर्जा देने का निर्णय लिया था, लेकिन यह योजना लीक हो गई। तसद्दुक को मंत्री पद का दर्जा दिए जाने से पहले ही नेशनल कांफ्रेंस का विरोध सामने आ गया। इस कारण रणनीति बदलते हुए तसद्दुक को मुख्यमंत्री के शिकायत प्रकोष्ठ का कार्डिनेटर बना दिया गया।
बॉलीबुड से रियासत की राजनीति में आए तसद्दुक
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
- फोटो : File Photo
दरअसल मंत्री पद का दर्ज नहीं रहने के कारण तसद्दुक को विशेष सुरक्षा के अलावा अन्य सुविधाएं मुहैया कराने में वैधानिक दिक्कतें महसूस की जा रही थी। अब सीएम के प्रकोष्ठ के समन्वयक के नाते तसद्दुक को कई अधिकार हासिल हो गए हैं।
समन्वयक बनने के बाद तसद्द्ुक अब आईएएस अफसरों की बैठकें भी लेने लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद के जीवन काल में सियासत से दूर रहकर फिल्म निर्माण उद्योग से जुड़े तसद्दुक अब सियासत में ज्यादा सक्रिय हैं। वे कश्मीर से जुड़े मसलों पर बेबाक विचार प्रकट कर रहे हैं, जिनमें से कई बयान सहयोगी दल भाजपा की विचारधारा के बिल्कुल विपरीत होते हैं। अनंतनाग चुनाव टालने के बारे में भी उन्होंने सबसे पहले मांग रखी थी। रणनीति के तहत मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने के कारण महबूबा जिन मुद्दें को उठाने में संकोच करती हैं, अब उन्हें तसद्दुक उठा सकते हैं।
तसद्दुक ने शुक्रवार को राज्य प्रदूषम बोर्ड के अधिकारियों की विधिवत बैठक ली। इससे पहले वे कश्मीर में स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा करने के साथ अस्पतालों का दौरा भी कर चुके हैं। इस सक्रियता से शासन और पुलिस प्रशासन में भी तसद्दुक की धमक दिखने लगी है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मंत्री बशारत बुखारी और इमरान रजा अंसारी ने विभागों के फेरबदल से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया था। मंत्री पद से हटाए गए चार विधायक भी महबूबा के विरोध में मुखर रहे हैं। ऐसे में महबूबा कई मोर्चों पर खुद को अकेला पाती रहीं हैं। तसद्दुक की सक्रियता संभवत: उसी संदर्भ में है।