सोलह साल पहले रूठकर घर से चले गए एक बुजुर्ग को आधार कार्ड ने फिर मिलवा दिया। जब वह घर लौटा तो परिवार वालों की खुशी की सीमा नहीं रही। आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परिवार के लिए यह पल किसी उत्सव से कम नहीं था।
घरोटा इलाके के कोट मोड़ा खत्रियां (भलावल) निवासी मोहम्मद शरीफ हुसैन छह मई 2001 को अपने परिवार वालों से रूठकर चला गया था। वह हिमाचल प्रदेश के कोट खुई (शिमला) में जाकर मजदूरी करने लगा। वह घर पर पत्नी और नौ बच्चों (छह बेटियां और तीन बेटे) को छोड़ गया था। शिमला में जिनके यहां वह काम करता था, कुछ दिनों पहले उन लोगों ने मोहम्मद शरीफ का आधार कार्ड बनवाया।
इसके लिए शरीफ ने अपने घर का पता दिया, लेकिन उसने निवेदन किया आधार कार्ड शिमला में उसके निवास स्थान पर भेजा जाए, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आधार कार्ड सीधे उसके मूल पते पर घर पहुंचा। जब उसकी पत्नी शूमी बीबी को आधार कार्ड तो उसने यह बात परिवार वालों को बताई। परिवार वालों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने तफ्तीश शुरू की तो मामला परत दर परत खुलता गया।