शिक्षा संस्थानों में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन अमूमन किया जाता है, लेकिन इन आयोजनों को महज मनोरंजन तक सीमित न रखते हुए प्रतिभाओं की खोज के तौर पर विकसित किया जाएगा।
स्कूलों और कालेजों की सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रतिस्पर्धी और संयोजित करने के लिए कला, सांस्कृतिक एवं भाषा अकादमी खास पहल करने जा रही है।
अकादमी रियासत के तमाम शिक्षा संस्थानों के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों का वार्षिक कैलेंडर बनाने जा रही है। कला, संस्कृति, ड्रामा और लेखन सहित अन्य गतिविधियों का मुकम्मल कैलेंडर डिजाइन किया जा रहा है।
इसके तैयार होते ही उच्च शिक्षा एवं स्कूली शिक्षा के निदेशालय इस कैलेंडर को बाकायदा आदेश के रूप में लागू करेंगे। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य शिक्षा संस्थानों के विद्यार्थियों को कला, संस्कृति और भाषा से संबंधित गतिविधियों से जोड़ना है।
अकादमी के सूत्रों ने बताया कि वार्षिक कैलेंडर लागू होने के बाद हर शैक्षिक सत्र में विद्यार्थियों की स्पर्धाएं स्कूल से लेकर तहसील, जिला, प्रांत और राज्य स्तर पर आयोजित की जाएंगी।
शिक्षा संस्थानों से नई प्रतिभाओं की खोज की योजना को लेकर अकादमी ने राज्यपाल से मश्विरा किया था। इसके बाद पिछले दिनों ही स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा निदेशकों के साथ अकादमी की बैठक आयोजित की गई थी।
कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के सचिव डॉ अजीज हाजिनी ने बताया कि नई पीढ़ी की प्रतिभाएं खोजने के लिए वार्षिक कैलेंडर तैयार किया जा रहा है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से आयोजित करने के लिए इच्छुक शिक्षकों को अकादमी विशेष प्रशिक्षण देगी। इसके लिए प्रशिक्षकों का पैनल तैयार किया जा रहा है।
अकादमी द्वारा प्रकाशित शिराजा पत्रिका को नई प्रतिभाओं के लिए प्रभावी मंच के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। नौ अलग-अलग भाषाओं में प्रकाशित होने वाली शिराजा पत्रिका का वर्ष में एक अंक स्कूल-कालेजों के विद्यार्थियों की रचनाओं को समर्पित किया जाएगा।